
वैशाली जिले की मानवी कुमारी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा घोषित इंटरमीडिएट 2026 के परिणामों में अपनी उत्कृष्टता का लोहा मनवाया है। उत्क्रमित उच्च विद्यालय, देशरी की छात्रा ने वाणिज्य संकाय में 474 अंक (94.8%) प्राप्त कर पूरे बिहार में चौथा स्थान हासिल किया। जैसे ही यह खबर फैली, मानवी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया।
मेहनत और संघर्ष की कहानी
मानवी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता पंकज कुमार पिछले 25 वर्षों से घर-घर अखबार वितरित करते आए हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद, मानवी ने हार मानने के बजाय खुद रास्ता निकाला और पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए छोटे बच्चों को होम ट्यूशन देना शुरू किया। उन्होंने ट्यूशन की आमदनी से अपनी किताबें और कॉपियां खरीदी, ताकि माता-पिता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
दादी की प्रेरणा और CA बनने का सपना
मानवी ने मीडिया से बातचीत में अपनी सफलता का श्रेय दादी और पूरे परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनकी दादी उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करती रही हैं। मानवी अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहती हैं और इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर उन्होंने वाणिज्य संकाय का चयन किया था।
जूनियर्स के लिए संदेश
मानवी ने वाणिज्य संकाय लेने वाले छात्रों को प्रेरक संदेश देते हुए कहा:
- “समाज अक्सर कहता है कि कॉमर्स अच्छे नहीं होते, लेकिन मेहनत से इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।”
- “कक्षा 11वीं को हल्के में न लें। यह आधार बनाती है और 12वीं की पढ़ाई आसान बनाती है।”
- “सिर्फ परीक्षा के आखिरी दो महीनों में पढ़ाई करके आप पास तो हो सकते हैं, लेकिन टॉपर बनने के लिए पूरे साल मेहनत जरूरी है।”
परिवार के लिए गर्व का क्षण
मानवी के पिता पंकज कुमार अखबार बेचने के साथ एक छोटी किराने की दुकान भी चलाते हैं। उनकी मां संगीता देवी गृहिणी हैं। परिवार में चार बच्चे हैं, जिनमें से दो बेटियां दिव्यांग हैं। मानवी की सफलता ने पूरे परिवार के दुःखों को खुशियों में बदल दिया।


