HIGHLIGHTS: अन्नदाता की मेहनत पर फिरा पानी; 20 मार्च की आंधी-बारिश ने बिगाड़ा खेती का गणित, सांसद ने उठाई आवाज
- बड़ी पहल: भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कृषि मंत्री को लिखा पत्र; राहत की लगाई गुहार।
- तबाही का मंजर: 20 मार्च को आई बेमौसम आंधी, तेज बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को पहुँचा भारी नुकसान।
- मक्का पर मार: विशेष रूप से मक्के की खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद; किसानों की पूंजी और मेहनत दांव पर।
- प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: गोपालपुर, बिहपुर, नाथनगर, पीरपैंती, भागलपुर सदर और कहलगांव के प्रखंडों में भारी क्षति।
- VOB इनसाइट: ‘मकई’ के गढ़ कहे जाने वाले इन इलाकों में फसल बर्बादी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा गहरा असर।
भागलपुर | 23 मार्च, 2026
होली के रंग अभी उतरे भी नहीं थे कि भागलपुर के किसानों की आंखों में बेमौसम बारिश ने आंसू ला दिए हैं। 20 मार्च को प्रकृति के बदले मिजाज ने भागलपुर संसदीय क्षेत्र के हजारों किसानों की उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया। इसी गंभीर संकट को देखते हुए भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल ने सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रदेश के कृषि मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की रिपोर्ट के अनुसार, सांसद ने पत्र लिखकर प्रभावित किसानों के लिए तत्काल आर्थिक मदद और मुआवजे की अपील की है।
“पूंजी और पसीना दोनों डूबे”: सांसद ने बयां किया किसानों का दर्द
सांसद अजय मंडल ने अपने पत्र में 20 मार्च की उस काली दोपहर का जिक्र किया है, जब अचानक आई आंधी और ओलावृष्टि ने मक्के की फसल को जमींदोज कर दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि गोपालपुर से लेकर पीरपैंती तक के विशाल मैदानी इलाकों में मक्के की फसल अब कटने या दाने भरने की स्थिति में थी, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि विभाग के माध्यम से ‘विशेष सर्वेक्षण’ कराया जाए ताकि असल नुकसान का पता चल सके।
VOB डेटा चार्ट: फसल क्षति और प्रशासनिक मांग
- आपदा की तिथि: 20 मार्च, 2026 (बेमौसम आंधी-ओलावृष्टि)।
- सबसे ज्यादा प्रभावित फसल: मक्का (Maize)।
- प्रभावित विधानसभा क्षेत्र: गोपालपुर, बिहपुर, नाथनगर, पीरपैंती, भागलपुर सदर और कहलगांव।
- मुख्य मांग: प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल विशेष सर्वेक्षण और वास्तविक क्षति के आधार पर उचित मुआवजा।
- अपीलकर्ता: सांसद अजय कुमार मंडल।
- पत्र प्राप्ति: मुख्यमंत्री सचिवालय एवं कृषि मंत्रालय, बिहार सरकार।
VOB का नजरिया: क्या कागजों से निकलकर खेतों तक पहुँचेगा मुआवजा?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि सांसद की यह तत्परता सराहनीय है, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी हैं।
- सर्वेक्षण में देरी: अक्सर देखा गया है कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि जब तक मुआवजा आता है, तब तक किसान कर्ज के बोझ तले दब चुका होता है। प्रशासन को ‘रैपिड सर्वे टीम’ लगानी होगी।
- मक्का—सीमांचल की लाइफलाइन: भागलपुर और आसपास के इलाकों के लिए मक्का केवल फसल नहीं, बल्कि बैंक बैलेंस है। इसकी बर्बादी का मतलब है बच्चों की पढ़ाई और शादियों पर संकट।
- बीमा कंपनियों की भूमिका: क्या इन किसानों का ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत कवरेज है? अगर है, तो बीमा कंपनियों को भी सांसद के पत्र के आधार पर जवाबदेह बनाना होगा।
निष्कर्ष: सुशासन से इंसाफ की उम्मीद
सांसद अजय मंडल ने स्पष्ट किया है कि वे इस कठिन समय में किसानों के साथ खड़े हैं और विभागीय स्तर पर इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाएंगे। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पत्र पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं और कृषि विभाग की टीमें कब तक खेतों में उतरती हैं।


