
नई दिल्ली/लखनऊ | देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके तार बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी सोलर कैमरों के जरिए भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखते थे और संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेजते थे।
सोलर कैमरों से निगरानी, हर फोटो के मिलते थे पैसे
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने दिल्ली और हरियाणा के रेलवे स्टेशनों व अन्य संवेदनशील इलाकों के आसपास गुप्त रूप से सोलर-पावर्ड कैमरे लगाए थे।
- इन कैमरों से सेना की मूवमेंट की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे
- फिर इन्हें विदेशी हैंडलर्स को भेजा जाता था
- हर फोटो/वीडियो के बदले आरोपियों को ₹4000 से ₹6000 तक भुगतान मिलता था
सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह की योजना देशभर में ऐसे करीब 50 कैमरे लगाने की थी, जिससे बड़े स्तर पर जासूसी की जा सके।
‘पंचर की दुकान’ की आड़ में चल रहा था खेल
इस नेटवर्क का एक अहम चेहरा बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी नौशाद अली उर्फ लालू है, जो हरियाणा के फरीदाबाद में पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार—
- नौशाद इस गिरोह के सरगना का करीबी सहयोगी था
- वह सीधे विदेशी हैंडलर के संपर्क में था
- गाजियाबाद पुलिस ने उसे 16 मार्च को एक गुप्त ऑपरेशन में गिरफ्तार किया
उसके मोबाइल फोन से कई संवेदनशील दस्तावेज, चैट और फोटो बरामद किए गए हैं, जो जासूसी गतिविधियों की पुष्टि करते हैं।
महिला आरोपी की भूमिका भी अहम
इस मामले में मथुरा से एक महिला आरोपी मीरा को भी गिरफ्तार किया गया है।
- मीरा पर हथियारों की तस्करी में शामिल होने का आरोप
- उसके पास से सैन्य और संवेदनशील इलाकों की सैकड़ों तस्वीरें मिलीं
- वह नेटवर्क में लॉजिस्टिक और सूचना ट्रांसफर का प्रमुख माध्यम थी
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह महिला इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी थी।
देशभर में फैला था जाल, 20 से ज्यादा गिरफ्तार
अब तक इस जासूसी नेटवर्क से जुड़े 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि गिरोह का मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस नेटवर्क में कुछ नाबालिगों को भी शामिल किया गया था, जिन्हें कथित तौर पर बहकाकर इस काम में लगाया गया।
संदिग्ध संपत्ति और फंडिंग की जांच
नौशाद की गिरफ्तारी के बाद उसके पैतृक गांव (बिहार) में भी जांच तेज कर दी गई है।
- परिवार के बैंक खातों और लेन-देन की जांच
- अचानक बढ़ी संपत्ति पर नजर
- टेरर फंडिंग के स्रोत तलाशने की कोशिश
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क को फंडिंग कहां से और कैसे मिल रही थी।
हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। कई राज्यों में संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता था।
निष्कर्ष
एक साधारण ‘पंचर बनाने वाले’ की आड़ में चल रहा यह जासूसी नेटवर्क यह दिखाता है कि दुश्मन देश अब नई-नई तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल कर भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के साथ-साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी बेहद जरूरी हो गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते सूचना दी जा सके और देश सुरक्षित रह सके।


