HIGHLIGHTS: जमालपुर के रेल यात्रियों के लिए ‘होली’ का बड़ा तोहफा; अत्याधुनिक कोच के साथ दौड़ेगी एक्सप्रेस
- बड़ा बदलाव: पूर्व रेलवे का फैसला—पुराने नीले (ICF) कोच की जगह अब अत्याधुनिक LHB रैक में चलेगी कवि गुरु एक्सप्रेस।
- तारीख नोट करें: हावड़ा से 29 मार्च और जमालपुर से 30 मार्च 2026 से प्रभावी होगी नई व्यवस्था।
- वेटिंग से राहत: नए कोचों की क्षमता अधिक होने के कारण सीटों की संख्या बढ़ेगी, यात्रियों को सीट मिलना होगा आसान।
- रफ्तार और सुरक्षा: 160 किमी/घंटा की गति के लिए सक्षम जर्मन तकनीक; दुर्घटना की स्थिति में पलटने का खतरा न के बराबर।
- VOB इनसाइट: सुरक्षित सफर और ‘झटकों’ से मुक्ति; आधुनिक रेल यात्रा की ओर बढ़ता जमालपुर।
जमालपुर | 23 मार्च, 2026
जमालपुर और मुंगेर के रेल यात्रियों के लिए एक शानदार खबर है। पूर्व रेलवे ने रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जमालपुर और हावड़ा के बीच चलने वाली लोकप्रिय ट्रेन कवि गुरु एक्सप्रेस अब अपने पुराने नीले अवतार को छोड़कर आधुनिक लाल-सफेद (LHB) अवतार में नजर आएगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के अंतिम सप्ताह से इस ट्रेन का कायाकल्प होने जा रहा है, जिससे यात्रियों को न केवल सुरक्षा मिलेगी बल्कि सफर का अनुभव भी पूरी तरह बदल जाएगा।
नीले कोच का अंत, जर्मन तकनीक का आगाज़
कवि गुरु एक्सप्रेस अब तक पुराने ‘नीले’ यानी आईसीएफ (ICF) कोचों के साथ पटरी पर दौड़ती थी। लेकिन अब इसे जर्मन तकनीक पर आधारित एलएचबी (LHB) रैक में बदला जा रहा है। हावड़ा से यह ट्रेन 29 मार्च को नए रैक के साथ रवाना होगी, जबकि जमालपुर से इसकी शुरुआत 30 मार्च 2026 को होगी।
इन कोचों की सबसे बड़ी खासियत इनका ‘एंटी-क्लाइम्बिंग’ फीचर है। इसका मतलब है कि खुदा-न-खास्ता अगर कभी दुर्घटना होती है, तो ये कोच एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ेंगे और न ही पलटने की संभावना रहेगी। सुरक्षा के लिहाज से यह जमालपुर-हावड़ा रूट के यात्रियों के लिए एक बड़ी जीत है।
VOB डेटा चार्ट: कवि गुरु एक्सप्रेस का नया ‘पावर’ प्रोफाइल
- कोच का प्रकार: पुराने नीले (ICF) से अब आधुनिक LHB (Linke Hofmann Busch)।
- प्रभावी तिथि (हावड़ा): 29 मार्च 2026 से।
- प्रभावी तिथि (जमालपुर): 30 मार्च 2026 से।
- अधिकतम रफ्तार क्षमता: 160 किमी/घंटा तक (समय की बचत की संभावना)।
- सीटों की संख्या: पुराने कोचों की तुलना में 10-15% अधिक सीटों की उपलब्धता।
- मुख्य लाभ: वेटिंग लिस्ट के यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की बढ़ी संभावना और कम शोर वाला आरामदायक सफर।
VOB का नजरिया: क्या केवल ‘कोच’ बदलना काफी है?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि जमालपुर जैसे ऐतिहासिक रेल हब के लिए यह अपग्रेड काफी समय से प्रतीक्षित था।
- वेटिंग का झंझट खत्म: अक्सर कवि गुरु एक्सप्रेस में सीटों की भारी किल्लत रहती है। एलएचबी कोच की लंबाई और क्षमता अधिक होती है, जिससे हर कोच में अधिक यात्री सफर कर पाएंगे। यह ‘वेटिंग’ की समस्या का एक बड़ा समाधान है।
- टूरिज्म को बूस्ट: हावड़ा और जमालपुर के बीच बड़ी संख्या में व्यापारी और पर्यटक यात्रा करते हैं। आधुनिक कोच यात्रियों को एक ‘प्रीमियम’ अनुभव देंगे, जिससे रेलवे की छवि भी सुधरेगी।
- सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं: पुरानी पटरियों पर तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए एलएचबी कोच सबसे सुरक्षित विकल्प हैं।
सुशासन और आधुनिक रेल का संगम
कवि गुरु एक्सप्रेस में एलएचबी रैक का लगना यह दर्शाता है कि रेलवे अब ‘क्वालिटी’ पर ध्यान दे रहा है। 30 मार्च से जब यह ट्रेन जमालपुर स्टेशन पर अपने नए रैक के साथ खड़ी होगी, तो वह एक ‘उन्नत बिहार’ की नई तस्वीर पेश करेगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ यात्रियों से अपील करता है कि वे आधुनिक कोचों की स्वच्छता बनाए रखने में रेल प्रशासन का सहयोग करें।


