HIGHLIGHTS: योगापट्टी में ‘पुल’ निर्माण के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा; दोनों पक्षों ने दर्ज कराई प्राथमिकी
- बड़ी खबर: नवलपुर थाना क्षेत्र के सेमरी बगहा चौक के पास पुल निर्माण कार्य के दौरान हुई मारपीट में मनीष कश्यप का नाम आया सामने।
- आरोप: त्रिभुवन नारायण कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी संजीत कुमार सिंह ने मनीष कश्यप और उनके समर्थकों पर मारपीट और काम रोकने का लगाया आरोप।
- काउंटर FIR: पुलिस के अनुसार मामला एकतरफा नहीं है; दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
- घटना की तारीख: 20 मार्च 2026 को दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ विवाद कानूनी मोड़ पर पहुँचा।
- जांच जारी: पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
बेतिया / योगापट्टी | 23 मार्च, 2026
बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार मामला पश्चिम चंपारण के योगापट्टी (नवलपुर थाना) क्षेत्र का है, जहाँ एक निर्माणाधीन पुल के संवेदक (ठेकेदार) के साथ मारपीट के मामले में मनीष कश्यप और उनके करीब एक दर्जन समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, विकास कार्यों के निरीक्षण के नाम पर हुआ यह विवाद अब थाने की चौखट तक पहुँच गया है।

क्या है पूरा विवाद? ‘ढलाई’ के सामान को लेकर भिड़े दो पक्ष
लखनऊ के गोमती नगर निवासी और त्रिभुवन नारायण कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी संजीत कुमार सिंह ने पुलिस को दिए आवेदन में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, कंपनी नवलपुर रोड में बगहा चौक के समीप एक पुल का निर्माण करा रही है।
20 मार्च को दोपहर करीब 12 बजे जब वे पुल की ढलाई के लिए कुछ सामान लाने वीरेंद्र गुप्ता के यहाँ गए थे, तभी वहां विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि मनीष कश्यप और उनके साथ आए करीब एक दर्जन लोगों ने काम में बाधा डाली और मारपीट की। दूसरी तरफ, मनीष कश्यप के समर्थकों का भी अपना पक्ष है, जिसके आधार पर पुलिस ने दोनों ओर से मामला दर्ज किया है।
VOB डेटा चार्ट: मनीष कश्यप मारपीट केस की पूरी फाइल
- घटनास्थल: सेमरी बगहा चौक, नवलपुर थाना क्षेत्र (योगापट्टी)।
- शिकायतकर्ता: संजीत कुमार सिंह (पिता- अशोक सिंह, लखनऊ)।
- कंपनी का नाम: त्रिभुवन नारायण कंस्ट्रक्शन कंपनी।
- मुख्य आरोपी: मनीष कश्यप एवं एक दर्जन अन्य।
- विवाद का कारण: पुल निर्माण की सामग्री और कार्य के दौरान हस्तक्षेप।
- पुलिस की कार्रवाई: दोनों पक्षों की FIR दर्ज, जांच के लिए टीम गठित।
VOB का नजरिया: ‘डिजिटल सक्रियता’ और ‘जमीनी विवाद’ के बीच की लकीर
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि बिहार में ‘निरीक्षण’ की राजनीति अब खतरनाक मोड़ पर पहुँच रही है।
- कानून हाथ में लेना गलत: यदि निर्माण कार्य में गड़बड़ी थी, तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग या डीएम से की जा सकती थी। मारपीट और कार्यस्थल पर हंगामा विकास की रफ्तार को धीमा करता है।
- सिक्के के दो पहलू: चूँकि प्राथमिकी दोनों तरफ से दर्ज हुई है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिसिया जांच में ‘हमलावर’ कौन निकलता है। क्या यह वास्तव में विकास की चिंता थी या केवल ‘डिजिटल कंटेंट’ बनाने की होड़?
- मनीष की बढ़ती कानूनी चुनौतियां: जेल से बाहर आने के बाद मनीष कश्यप ने जिस तरह से अपनी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता बढ़ाई है, ऐसे में एक और FIR उनके भविष्य के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
निष्कर्ष: सुशासन में ‘न्याय’ की उम्मीद
नवलपुर पुलिस मामले की जांच में जुटी है। चंपारण की जनता यह देख रही है कि क्या ‘सच’ का दावा करने वाले कानून के आइने में खरे उतरते हैं या नहीं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस मामले की हर अपडेट आप तक निष्पक्षता के साथ पहुँचाता रहेगा।


