
HIGHLIGHTS: युद्ध के साये में ‘आत्मनिर्भर’ भारत की तैयारी; रसोई से लेकर खेत तक की सुरक्षा पर PM का पहरा
- इमरजेंसी मीटिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की।
- बड़ा फैसला: पश्चिम एशिया (West Asia) संघर्ष के असर से आम आदमी को बचाने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण का एलान।
- अन्नदाता की चिंता: खरीफ सीजन के लिए खाद (Fertilizer) के वैकल्पिक स्रोतों पर चर्चा; स्टॉक पर्याप्त रखने के निर्देश।
- नो ब्लैकआउट: देश के सभी पावर प्लांट में कोयले का पर्याप्त भंडार; बिजली संकट की आशंका को किया खारिज।
- जमाखोरी पर स्ट्राइक: राज्यों के साथ समन्वय कर जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त आदेश।
नई दिल्ली | 23 मार्च, 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में आ गई है। रविवार (22 मार्च) देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक का एकमात्र उद्देश्य था—वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय नागरिकों की रसोई, किसानों के खेत और देश की अर्थव्यवस्था को ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान करना। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने युद्ध की स्थिति में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) टूटने से निपटने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्लान तैयार कर लिए हैं।
‘मिशन मोड’ में सरकार: खाद से लेकर कोयले तक का हिसाब
बैठक में कैबिनेट सचिव ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी, जिसमें युद्ध के वैश्विक आर्थिक प्रभावों और भारत पर पड़ने वाले असर का आकलन किया गया। पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि दुनिया के हालात चाहे जो हों, भारतीय नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए।
1. खेती और उर्वरक (Agriculture): आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए प्रधानमंत्री ने खाद की उपलब्धता की समीक्षा की। सरकार ने खाद के आयात के लिए केवल पश्चिम एशिया पर निर्भर रहने के बजाय ‘स्रोतों में विविधता’ (Diversification) लाने का फैसला किया है। किसानों को समय पर खाद मिले, इसके लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
2. ऊर्जा सुरक्षा (Energy): ईंधन की कीमतों में उछाल की आशंका के बीच पीएम ने बिजली क्षेत्र को लेकर बड़ी राहत दी है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया जाए ताकि देश में बिजली की कोई कमी न हो।
3. आयात-निर्यात (Trade): केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जैसे उद्योगों के लिए कच्चे माल के आयात के नए गंतव्य (Destinations) विकसित किए जाएंगे। साथ ही, भारतीय सामानों के लिए नए एक्सपोर्ट मार्केट तलाशने पर भी चर्चा हुई।
VOB डेटा चार्ट: CCS बैठक के 5 बड़े ‘डिफेंस’ पिलर
- खाद्य सुरक्षा: जमाखोरी पर नकेल — इसका मुख्य उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखना है।
- खेती: खाद के वैकल्पिक स्रोत — ताकि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की किल्लत से बचाया जा सके।
- बिजली: कोयले का बंपर स्टॉक — युद्ध के दौरान भी देश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- उद्योग: आयात में विविधता — कच्चे माल की सप्लाई चेन को टूटने से रोकने के लिए नए देशों से संपर्क।
- प्रशासन: ‘संपूर्ण सरकार’ एप्रोच — मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह बनाकर काम करना।
राज्य सरकारों को निर्देश: “कालाबाजारी पर हो सीधी कार्रवाई”
प्रधानमंत्री ने बैठक में राज्यों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युद्ध की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी कर सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि महंगाई पर लगाम कसी जा सके। पीएम ने मंत्रियों और सचिवों के एक विशेष समूह को इस पूरी स्थिति पर ‘चौबीसों घंटे’ नजर रखने का आदेश दिया है।
VOB का नजरिया: बिहार के लिए इसके क्या मायने हैं?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह मुस्तैदी बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए संजीवनी है।
- खाद की चिंता: बिहार का किसान खाद के लिए अक्सर संघर्ष करता है। केंद्र की ‘वैकल्पिक स्रोत’ वाली नीति से इस बार खरीफ में यूरिया और डीएपी की किल्लत कम हो सकती है।
- महंगाई पर लगाम: अगर बिहार सरकार केंद्र के निर्देशों का पालन करते हुए स्थानीय स्तर पर जमाखोरों पर नकेल कसती है, तो युद्ध के बावजूद नमक, तेल और दाल जैसी चीजों के दाम नियंत्रण में रहेंगे।
- बिजली का भरोसा: गर्मियों का सीजन आ रहा है, ऐसे में कोयले के पर्याप्त स्टॉक का आश्वासन बिहार के उद्योगों और घरों के लिए बड़ी राहत है।
निष्कर्ष: युद्ध वैश्विक, समाधान स्वदेशी
114वें बिहार दिवस के समापन और वैश्विक संकट के आगाज के बीच पीएम मोदी की यह CCS बैठक एक मजबूत संदेश है— “भारत किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।” ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) से बचें।


