HIGHLIGHTS: पटना में कला और सिनेमा का ‘महाकुंभ’; ‘चिड़िया’ ने सिखाया संघर्ष का मंत्र, तो आशीष विद्यार्थी ने चखी बिहार की मिठास
- सिनेमा का जादू: बिहार संग्रहालय में स्माइली फिल्म्स की अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘चिड़िया’ का विशेष प्रदर्शन।
- बड़ा संदेश: “जीवन में मुश्किलें चाहे कितनी भी हों, डटकर मुकाबला करें”—श्रीमती रूबी (GM, बिहार फिल्म निगम) का प्रेरणादायक संबोधन।
- फिल्म आंदोलन: राज्य में बच्चों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों के जरिए ‘रचनात्मक क्रांति’ की तैयारी।
- सेलिब्रिटी विजिट: बॉलीवुड अभिनेता आशिष विद्यार्थी ने गांधी मैदान के बिहार पवेलियन में पारंपरिक हस्तशिल्प और आधुनिक तकनीक का लिया आनंद।
- प्रशंसा: आशीष विद्यार्थी बोले— “बिहार की समृद्ध कला और विरासत अतुलनीय है।”
पटना | 22 मार्च, 2026
बिहार के 114वें स्थापना दिवस के जश्न में जहाँ पूरा पटना डूबा हुआ है, वहीं रविवार को राजधानी के सांस्कृतिक केंद्रों में कला और सिनेमा की एक नई इबारत लिखी गई। बिहार संग्रहालय के सभागार से लेकर गांधी मैदान के भव्य पवेलियन तक, ‘बिहारियत’ का गौरव साफ नजर आया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष कवरेज में देखिए कैसे एक ‘चिड़िया’ ने बच्चों को हौसलों की उड़ान सिखाई और कैसे एक मंझे हुए अभिनेता ने बिहार की मिट्टी को नमन किया।
‘चिड़िया’: हौसलों की वो फिल्म जो दुनिया जीतकर पटना पहुँची
बिहार दिवस के मौके पर कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम के संयुक्त तत्वावधान में फिल्म ‘चिड़िया’ का प्रदर्शन किया गया। स्माइली फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म कोई साधारण मनोरंजन नहीं, बल्कि संघर्ष और जीत की एक अंतरराष्ट्रीय दास्तां है, जिसे दुनिया भर के फिल्म महोत्सवों में सराहा गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार फिल्म निगम की महाप्रबंधक श्रीमती रूबी ने बेहद मार्मिक बात कही:
”फिल्में समाज का दर्पण होती हैं। ‘चिड़िया’ हमें सिखाती है कि चाहे लाख परेशानियां आएं, हमें बिना रुके अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ना चाहिए। बच्चों को प्रेरित करने वाली ऐसी फिल्में आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत हैं।”
वहीं, फिल्म सलाहकार अरविन्द रंजन दास ने बताया कि विभाग ने राज्य में संदेशात्मक फिल्मों के जरिए एक ‘रचनात्मक आंदोलन’ शुरू किया है, ताकि युवाओं और बच्चों में सही सोच विकसित हो सके।
जब बिहार की कला को निहारने पहुँचे ‘द्रोणाचार्य’ आशीष विद्यार्थी
रविवार का दिन गांधी मैदान के विभागीय पवेलियन के लिए बेहद खास रहा। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आशीष विद्यार्थी, जो अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जाने जाते हैं, बिहार की कला और संस्कृति को नजदीक से देखने पहुँचे। उन्होंने पवेलियन में लगी पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शनी और आधुनिक तकनीक आधारित प्रस्तुतियों का न केवल अवलोकन किया, बल्कि उसका भरपूर आनंद भी लिया।
आशीष विद्यार्थी ने बिहार की समृद्ध विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ की लोक कलाओं में जो सोंधी खुशबू है, वह दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। उन्होंने बिहार की बदलती तकनीक और संस्कृति के ‘फ्यूजन’ को भविष्य का मॉडल बताया।
VOB का नजरिया: सिनेमा और सेलिब्रिटी, बिहार की ब्रांडिंग के दो मजबूत स्तंभ
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि बिहार दिवस पर केवल सरकारी भाषण नहीं, बल्कि ऐसी गतिविधियां जरूरी हैं जो सीधे जनता के दिल को छुएं।
- सिनेमा एक हथियार: ‘चिड़िया’ जैसी फिल्मों को प्रमोट करना यह दर्शाता है कि बिहार सरकार अब सिनेमा को केवल टैक्स वसूलने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का औजार मान रही है।
- सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंस: आशीष विद्यार्थी जैसे कलाकारों का बिहार पवेलियन आना और उसकी सराहना करना, राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की छवि को ‘बिहारी अस्मिता’ के साथ जोड़ता है। यह पर्यटन और स्थानीय कलाकारों के लिए एक बड़ा बूस्ट है।
- अगली पीढ़ी के लिए सीख: फिल्म निगम का ‘रचनात्मक आंदोलन’ अगर सही दिशा में चला, तो बिहार से आने वाले समय में विश्वस्तरीय फिल्म मेकर और कहानीकार निकलेंगे।
निष्कर्ष: सुशासन और संस्कृति का बेजोड़ संगम
114वें बिहार दिवस पर जहाँ एक ओर ‘चिड़िया’ फिल्म ने बच्चों को संघर्ष का पाठ पढ़ाया, वहीं आशीष विद्यार्थी की मौजूदगी ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ उम्मीद करता है कि कला और संस्कृति विभाग का यह ‘सिनेमाई आंदोलन’ केवल उत्सवों तक सीमित न रहकर बिहार के हर जिले तक पहुँचेगा।


