HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी में ‘उन्नत बिहार’ का संकल्प; चाणक्य से दिनकर तक के गौरवशाली इतिहास को किया नमन
- भव्य शुभारंभ: भागलपुर के उप विकास आयुक्त (DDC) श्री प्रदीप कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर ‘रंगारंग सांस्कृतिक संध्या’ का किया आगाज़।
- टीम भागलपुर: अपर समाहर्ता दिनेश राम, राकेश रंजन और DEO राजकुमार शर्मा सहित जिले के तमाम आला अधिकारियों ने बढ़ाया उत्साह।
- प्रतिभा का सम्मान: कला, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन करने वाले नन्हे सितारों को मंच पर मिला ‘सम्मान’।
- विरासत की याद: वैशाली के गणतंत्र से लेकर विक्रमशिला के ज्ञान तक—DDC ने याद दिलाया बिहार का स्वर्णिम काल।
- बड़ा आह्वान: “अतीत गौरवशाली है, पर भविष्य की चुनौतियों (पलायन) से लड़ने के लिए युवाओं की ऊर्जा ही असली हथियार।”
भागलपुर | 22 मार्च, 2026
आज पूरा प्रदेश अपनी स्थापना के 114 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है, और भागलपुर का ऐतिहासिक टाउन हॉल इस गौरवशाली गाथा का गवाह बना। रविवार को यहाँ आयोजित ‘बिहार दिवस 2026’ समारोह में न केवल संगीत और नृत्य की गूँज सुनाई दी, बल्कि एक ‘उन्नत बिहार’ के निर्माण का दृढ़ संकल्प भी लिया गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, टाउन हॉल का मंच उस वक्त भावुक हो उठा जब उप विकास आयुक्त ने बिहार के संघर्ष और सामर्थ्य की दास्तां बयां की।
प्रभात फेरी से संगीत संध्या तक: उत्सव के विविध रंग
बिहार दिवस का आगाज़ सुबह प्रभात फेरी के साथ हुआ, जिसमें स्कूली बच्चों ने ‘बिहार गौरव’ के नारे लगाए। शाम होते ही टाउन हॉल रोशनी से नहा उठा। संगीत संध्या और कवि सम्मेलन में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बिहार की विविधता और एकता को खूबसूरती से मंच पर उतारा।
DDC का ‘पावर स्पीच’: 14 करोड़ सपनों की उड़ान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने एक बेहद प्रभावशाली विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि 1912 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बिहार का गठन एक प्रशासनिक आवश्यकता थी, लेकिन आज यह 14 करोड़ लोगों की अस्मिता का प्रतीक है।
”बिहार दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपने वैभवशाली इतिहास को जीने का अवसर है। यदि बिहार का हर नागरिक अपने दायित्व को समझे और सिर्फ एक कदम आगे बढ़ाए, तो हमारा प्रदेश एक साथ 14 करोड़ कदम आगे बढ़ सकता है। सुदृढ़ विधि-व्यवस्था, अच्छी सड़कें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही हमारे विकास की असली बुनियाद हैं।”
VOB डेटा चार्ट: बिहार की वो ‘विरासत’ जिसे टाउन हॉल में किया गया नमन
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चुनौतियां और पलायन: “हमारी मिट्टी में संघर्ष की शक्ति है”
DDC ने केवल इतिहास का गुणगान ही नहीं किया, बल्कि वर्तमान की कड़वी हकीकत ‘पलायन’ पर भी बेबाकी से बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि औपनिवेशिक काल के आर्थिक दोहन के कारण आज भी हमारे युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है। लेकिन उन्होंने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि बिहार की मिट्टी में वह ‘संघर्ष शक्ति’ है जो हर चुनौती को अवसर में बदल सकती है।
VOB का नजरिया: क्या ‘संकल्प’ धरातल पर उतरेगा?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर टाउन हॉल में अधिकारियों और जनता का यह जुड़ाव सकारात्मक है।
- सांस्कृतिक चेतना: बच्चों को पुरस्कृत करना उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- कर्तव्यों का बोध: DDC द्वारा संविधान में वर्णित ‘मूल कर्तव्यों’ की याद दिलाना यह दर्शाता है कि विकास केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
- विक्रमशिला का गौरव: भागलपुर के संदर्भ में विक्रमशिला विश्वविद्यालय का उल्लेख स्थानीय गौरव को नई ऊर्जा देता है।
निष्कर्ष: पुरस्कारों के साथ ‘नये बिहार’ की शुरुआत
समारोह के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार लेते बच्चों के चेहरों की मुस्कान यह बता रही थी कि ‘उन्नत बिहार’ का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस गौरवशाली आयोजन के लिए भागलपुर जिला प्रशासन और सभी कलाकारों को बधाई देता है।


