HIGHLIGHTS: विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में सनसनी; 3 साल से किराए के कमरे में ‘ज्ञान’ साध रहे थे राकेश, मौत ले गई साथ
- बड़ी त्रासदी: TNB कॉलेज के गेस्ट फैकल्टी राकेश कुमार (करीब 35 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।
- खौफनाक मंजर: परवती स्थित किराए के कमरे में मिला शव; दरवाजा अंदर से था बंद, कमरे में बिखरे थे उल्टी के निशान।
- अलर्ट: सलहज के बार-बार फोन करने पर भी जब नहीं उठा कॉल, तब मकान मालिक ने तोड़ा दरवाजा।
- पृष्ठभूमि: खरीक के अंबो गांव के रहने वाले थे राकेश; पिछले 3 साल से भागलपुर में रहकर कर रहे थे उच्च अध्ययन।
- पुलिस एक्शन: विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा; मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी फॉरेंसिक टीम।
भागलपुर | 22 मार्च, 2026
सिल्क सिटी भागलपुर का शैक्षणिक गलियारा आज उस वक्त शोक और सन्नाटे में डूब गया, जब टीएनबी (TNB) कॉलेज के एक होनहार गेस्ट फैकल्टी की मौत की खबर सामने आई। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के परवती इलाके में एक किराए के मकान में रह रहे राकेश कुमार का शव संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ है। कमरे के अंदर मिले साक्ष्यों और ‘उल्टी के निशानों’ ने इस मौत को एक रहस्यमय मोड़ दे दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की पड़ताल के अनुसार, राकेश एक शांत और अध्ययनशील शिक्षक थे, जिनकी अचानक विदाई ने उनके छात्रों और परिजनों को स्तब्ध कर दिया है।
आधी रात की खामोशी और ‘अनहोनी’ का अहसास
राकेश कुमार मूल रूप से खरीक थाना क्षेत्र के अंबो गांव के रहने वाले थे। वे पिछले तीन वर्षों से परवती में प्रदीप कुमार मंडल के मकान में किराए पर रह रहे थे। मकान मालिक के अनुसार, राकेश का अधिकांश समय किताबों के बीच ही बीतता था। वे एक अनुशासित किराएदार और गंभीर अध्येता थे।
घटना का खुलासा तब हुआ जब राकेश की सलहज ने उन्हें कई बार फोन किया। फोन की घंटी बजती रही, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका को देखते हुए सलहज ने मकान मालिक प्रदीप मंडल को सूचित किया। जब प्रदीप कमरे के पास पहुँचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब कोई हलचल नहीं हुई, तो पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा खोला गया। अंदर राकेश का बेजान शरीर पड़ा था।
कमरे में ‘उल्टी के निशान’: बीमारी या कुछ और?
मकान मालिक और पुलिस ने जब कमरे का मुआयना किया, तो वहां उल्टी के निशान पाए गए। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, यह किसी गंभीर फूड पॉइजनिंग, सडन कार्डियक अरेस्ट या किसी पुरानी बीमारी के अचानक बढ़ने का मामला हो सकता है। चूंकि दरवाजा अंदर से बंद था, इसलिए प्रथम दृष्टया किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की संभावना कम दिख रही है, लेकिन पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। कमरे में रखी किताबों और शैक्षणिक दस्तावेजों के बीच राकेश की खामोश लाश कई सवाल छोड़ गई है।
VOB का नजरिया: अकेले रह रहे युवाओं और शिक्षकों का ‘साइलेंट’ संकट
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर जैसे शहरों में किराए पर रहकर पढ़ाई या नौकरी कर रहे लोगों के लिए यह घटना एक ‘वेक-अप कॉल’ है।
- अकेलापन और स्वास्थ्य: राकेश जैसे कई स्कॉलर और गेस्ट फैकल्टी अकेले रहते हैं। ऐसे में अगर अचानक स्वास्थ्य बिगड़ता है, तो तुरंत मदद मिलना मुश्किल हो जाता है।
- मानसिक और शारीरिक दबाव: गेस्ट फैकल्टी के रूप में काम करना और साथ में उच्च अध्ययन का दबाव अक्सर स्वास्थ्य पर भारी पड़ता है। क्या राकेश किसी आंतरिक तनाव या बीमारी से जूझ रहे थे?
- प्रशासनिक जांच की जरूरत: विश्वविद्यालय थाना पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। ‘उल्टी के निशानों’ की टॉक्सिकोलॉजी जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि मौत स्वाभाविक थी या कुछ और।
निष्कर्ष: पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है सच्चाई
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर भागलपुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। मकान मालिक प्रदीप कुमार मंडल और राकेश के परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं। टीएनबी कॉलेज के प्रोफेसरों और छात्रों ने राकेश के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस दुखद घड़ी में शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।


