
HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी के खेतों में ‘मातम’; कुदरती मार से गेहूँ, मकई और ‘फलों के राजा’ पर मंडराया संकट
- कुदरत की मार: 20 मार्च 2026 को आए भीषण तूफान और बेमौसम बारिश ने भागलपुर के ग्रामीण अंचलों में मचाई भारी तबाही।
- फसलें तबाह: खेतों में खड़ी गेहूँ और मकई की फसलें पूरी तरह जमीन पर बिछीं; आम और लीची के मंजरों को भी भारी नुकसान।
- बड़ी पहल: स्वतंत्र पत्रकार रौशन सनगही ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेजा आवेदन; किसानों के लिए मांगी ‘आर्थिक संजीवनी’।
- मुख्य मांग: प्रभावित इलाकों का तत्काल ‘जीपीएस आधारित’ सर्वे हो और प्रभावित किसानों को सीधा मुआवजा मिले।
- संकट: भागलपुर के हजारों किसान परिवारों के सामने आजीविका और कर्ज चुकाने की बड़ी चुनौती खड़ी हुई।
भागलपुर | 22 मार्च, 2026
बिहार की धरती जिसे हम ‘अन्नपूर्णा’ कहते हैं, आज वहां का अन्नदाता आंसुओं में डूबा है। 20 मार्च 2026 को भागलपुर जिले में आए भीषण तूफान और मूसलाधार बारिश ने वो मंजर दिखाया है, जिसे कोई भी किसान याद नहीं करना चाहेगा। जहाँ एक तरफ 22 मार्च को पूरा प्रदेश ‘बिहार दिवस’ का जश्न मना रहा है, वहीं भागलपुर के खेतों में किसान अपनी बर्बाद हो चुकी फसलों को देख अपना सिर पीट रहे हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा ने केवल फसलें ही नहीं, बल्कि हजारों किसानों की साल भर की मेहनत और उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया है।
गेहूँ से लेकर लीची तक… सब कुछ स्वाहा!
इस बार का तूफान इतना भीषण था कि खेतों में पकने को तैयार खड़ी गेहूँ और मकई की फसलें ताश के पत्तों की तरह गिर गईं। जानकारों का कहना है कि गिरी हुई फसलों में सड़न पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
वहीं, भागलपुर की पहचान माने जाने वाले आम और लीची के बागानों को भी गहरी क्षति पहुँची है। तेज हवाओं के कारण फलदार पेड़ों से टिकोले (छोटे फल) और मंजर टूटकर गिर गए हैं, जिससे इस साल उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि “हमने खून-पसीना एक किया था, पर कुदरत ने एक पल में सब छीन लिया।”
रौशन सनगही की मुहिम: “मुख्यमंत्री जी, अब आपकी बारी है”
किसानों के इस दर्द को सरकार के कानों तक पहुँचाने के लिए स्वतंत्र पत्रकार रौशन सनगही ने कमान संभाली है। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक औपचारिक आवेदन भेजकर इस संकट की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है।
अपने आवेदन में रौशन सनगही ने स्पष्ट कहा है कि:
- आर्थिक संकट: फसल बर्बादी के कारण किसानों के सामने आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
- त्वरित सर्वे: प्रशासन को चाहिए कि बिना किसी देरी के हर खेत का भौतिक और तकनीकी सर्वे कराया जाए ताकि नुकसान का सही आंकड़ा मिल सके।
- मुआवजा वितरण: प्रभावित किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अगले सीजन की तैयारी कर सकें और महाजनों के कर्ज से बच सकें।
VOB का नजरिया: क्या केवल ‘राहत’ काफी है?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर में हुई यह तबाही ‘क्लाइमेट चेंज’ की ओर एक बड़ा इशारा है। हर साल मार्च-अप्रैल में आने वाले ये तूफान अब पहले से ज्यादा हिंसक हो रहे हैं।
- फसल बीमा का सच: बिहार में ‘फसल सहायता योजना’ तो है, लेकिन क्या वह इन किसानों तक समय पर पहुँच पाती है? अक्सर देखा गया है कि सर्वे में इतनी देरी होती है कि किसान अगली फसल बो देता है और मुआवजा फाइलों में दबा रह जाता है।
- पत्रकारिता का धर्म: रौशन सनगही जैसे युवा पत्रकारों का यह प्रयास सराहनीय है। जब मुख्यधारा की मीडिया उत्सवों में व्यस्त है, तब किसानों के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मजबूती को दर्शाता है।
- प्रशासन की जिम्मेदारी: भागलपुर जिला प्रशासन को चाहिए कि वह ‘बिहार दिवस’ की व्यस्तताओं के बीच किसानों के इस जख्म पर मरहम लगाए।
निष्कर्ष: सुशासन के बीच ‘अन्नदाता’ की पुकार
बिहार दिवस 2026 के इस ऐतिहासिक अवसर पर, जहाँ हम ‘उन्नत बिहार’ की बात कर रहे हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बिहार की उन्नति का रास्ता खेतों से होकर गुजरता है। अगर भागलपुर का किसान टूट गया, तो ‘उज्ज्वल बिहार’ का सपना अधूरा रह जाएगा। रौशन सनगही के इस आवेदन पर मुख्यमंत्री सचिवालय क्या एक्शन लेता है, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं।


