वाराणसी के घाटों से कोलकाता भेजे जा रहे थे कछुए; पटना जंक्शन पर रेल पुलिस का बड़ा एक्शन, बेजुबानों के मुंह पर लगा रखी थी ‘क्लिप’

HIGHLIGHTS: पटना जंक्शन पर ‘कछुआ तस्करी’ का भंडाफोड़; सुल्तानपुर के 5 तस्कर गिरफ्तार

  • बड़ी कार्रवाई: शुक्रवार तड़के 4 बजे पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म-3 पर फरक्का एक्सप्रेस से 5 तस्कर गिरफ्तार।
  • खौफनाक क्रूरता: कछुओं के पैर रस्सियों से बंधे थे और मुंह पर ‘क्लिप’ लगा दी गई थी ताकि वे आवाज न कर सकें।
  • वाराणसी कनेक्शन: तस्करों ने कबूला—वे वाराणसी के गंगा घाटों से कछुए पकड़ते थे और कोलकाता के ‘ब्लैक मार्केट’ में बेचते थे।
  • शोक: दम घुटने के कारण एक कछुए की तड़पकर मौत; कई अन्य बेजुबान बुरी तरह जख्मी।
  • जेल: सुल्तानपुर (UP) के रहने वाले पप्पू, आकाश, रजत, अक्षय और गीता देवी को कोर्ट ने भेजा जेल।

पटना | 22 मार्च, 2026

​राजधानी पटना का रेलवे जंक्शन शुक्रवार की अल सुबह एक ऐसी क्रूरता का गवाह बना, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। जहाँ एक तरफ हम गंगा को ‘मां’ कहते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उसी गंगा की गोद में पलने वाले जीवों का सौदा कर रहे हैं। Patna Junction Turtle Smuggling के एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए रेल पुलिस (GRP) और वन विभाग ने फरक्का एक्सप्रेस से पांच तस्करों को दबोचा है। इनके पास से भारी मात्रा में जीवित कछुए बरामद हुए हैं, जिन्हें बेहद अमानवीय तरीके से बोरी और बैग में भरकर ले जाया जा रहा था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कैसे बनारस के घाटों से शुरू हुआ यह ‘खूनी कारोबार’ पटना में बेनकाब हुआ।

प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर ‘ऑपरेशन क्लीन’: तड़के 4 बजे की कार्रवाई

​शुक्रवार की सुबह जब पटना जंक्शन पर फरक्का एक्सप्रेस पहुँची, तो जीआरपी को कुछ संदिग्ध बैगों की सूचना मिली। प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर मुस्तैद पुलिस टीम ने जब घेराबंदी की, तो उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले पांच लोग—पप्पू कुमार, आकाश कुमार, रजत कुमार, अक्षय कुमार और गीता देवी—पुलिस को देखकर भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने जब उनके भारी-भरकम बैगों को खोला, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी सन्न रह गए। बैगों के अंदर कछुओं को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था।

बेजुबानों पर ‘क्लिप’ की क्रूरता: तड़पकर हुई एक की मौत

​वन विभाग के पटना पश्चिमी इलाके के रेंजर अमन कुमार ने बताया कि तस्करों ने कछुओं के साथ ऐसी हैवानियत की थी जो कल्पना से परे है। कछुए बैग के अंदर हिले-डुले नहीं और कोई आवाज न करें, इसके लिए तस्करों ने कछुओं के मुंह को मजबूत क्लिप से बांध दिया था। इतना ही नहीं, उनके पैरों को भी रस्सी से कस दिया गया था

​इस अमानवीयता का नतीजा यह हुआ कि हवा की कमी और दम घुटने के कारण एक कछुए की मौके पर ही मौत हो गई। कई कछुए बुरी तरह घायल मिले हैं, जिन्हें वन विभाग की टीम ने अपने संरक्षण में लेकर प्राथमिक उपचार दिया है।

VOB डेटा शीट: पकड़े गए तस्करों की ‘कुंडली’

नाम

पता

भूमिका

पप्पू कुमार

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश

मुख्य तस्कर (हैंडलर)

आकाश कुमार

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश

ट्रांसपोर्टेशन/निगरानी

रजत कुमार

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश

माल की लोडिंग

अक्षय कुमार

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश

सिंडिकेट सदस्य

गीता देवी

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश

महिला होने का फायदा उठाकर शक से बचना

खुलासा: वाराणसी से कोलकाता तक ‘ब्लैक मार्केट’ का जाल

​पूछताछ में तस्करों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि वे वाराणसी के अलग-अलग गंगा घाटों से इन कछुओं को पकड़ते थे। Patna Junction Turtle Smuggling केवल एक पड़ाव था; इनका असली डेस्टिनेशन कोलकाता था। तस्करों के मुताबिक, कोलकाता में एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय रैकेट सक्रिय है, जो इन कछुओं को महंगे दामों पर खरीदता है।

क्यों है कछुओं की डिमांड?

  1. अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र: कई लोग कछुओं को ‘सौभाग्य’ से जोड़कर देखते हैं, जिसके कारण इनकी अवैध तस्करी होती है।
  2. मांस का व्यापार: कोलकाता और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में कछुओं के मांस की भारी मांग है।
  3. दवा निर्माण: कुछ पारंपरिक दवाओं में कछुए के अंगों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जाता है।

VOB नजरिया: क्या हमारी गंगा अब सुरक्षित नहीं?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि यह घटना केवल वन्यजीव अपराध नहीं, बल्कि गंगा की इकोसिस्टम पर सीधा हमला है। कछुए गंगा के ‘सफाई कर्मचारी’ कहे जाते हैं, जो जलीय गंदगी और मृत अवशेषों को खाकर नदी को स्वच्छ रखते हैं। अगर वाराणसी और पटना जैसे शहरों से कछुए इसी तरह गायब होते रहे, तो ‘नमामि गंगे’ जैसे प्रोजेक्ट्स कभी सफल नहीं हो पाएंगे।

​रेंजर अमन कुमार और पटना जंक्शन की जीआरपी की मुस्तैदी की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि वाराणसी स्टेशन पर ये तस्कर ट्रेनों में माल लोड कैसे कर लेते हैं? क्या वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत है या फिर चेकिंग में भारी चूक? सुल्तानपुर के इन तस्करों का पकड़ा जाना केवल एक ‘छोटी मछली’ के पकड़े जाने जैसा है; असली ‘मगरमच्छ’ तो कोलकाता में बैठा है जो फोन पर यह पूरा खेल चला रहा है।

निष्कर्ष: जेल की सलाखों के पीछे तस्कर

​पकड़े गए पांचों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत केस दर्ज किया गया है। शनिवार को पटना की एक अदालत में पेशी के बाद सभी तस्करों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वन विभाग अब कोलकाता के उस ‘बड़े रैकेट’ तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है जिसका जिक्र पप्पू और उसके साथियों ने किया है।

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