HIGHLIGHTS: भेलवा गांव में आधी रात को मौत का तांडव; जमीन की जंग ने उजाड़ा एक हँसता-खेलता परिवार
- बड़ी वारदात: सलखुआ थाना क्षेत्र के भेलवा गांव में शुक्रवार देर रात बदमाशों ने घर में घुसकर 28 वर्षीय रौशनी कुमारी की हत्या की।
- खौफनाक मंजर: बदमाशों को आता देख पति छैला बिहारी छत से कूदकर भागा, पीछे रह गई पत्नी पर हुआ ताबड़तोड़ हमला।
- बेरहमी: गर्दन पर चाकू से कई वार कर बदमाशों ने रोशनी को मौत के घाट उतारा; बिस्तर पर मिला लहुलुहान शव।
- वजह: सिमरीबख्तियारपुर एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर के मुताबिक, शुरुआती जांच में हत्या का कारण ‘भू-विवाद’ (जमीन का झगड़ा)।
- पुलिस एक्शन: शव का पोस्टमार्टम कराकर जांच शुरू; पुराने विवाद से जुड़े आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी।
सहरसा | 22 मार्च, 2026
बिहार के सहरसा जिले में जमीन की भूख ने एक बार फिर खूनी रूप अख्तियार कर लिया है। सलखुआ थाना क्षेत्र की उटेशरा पंचायत के भेलवा गांव (वार्ड-7) में शुक्रवार की आधी रात जो कुछ हुआ, उसने पूरे इलाके की रूह कपा दी। महज 28 साल की रौशनी कुमारी को अपनी जान इसलिए गंवानी पड़ी क्योंकि दो पक्षों के बीच जमीन का विवाद चल रहा था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला इतना सुनियोजित था कि बदमाशों ने रोशनी को संभलने तक का मौका नहीं दिया।
जहाँ एक तरफ बिहार सरकार ‘भूमि सुधार’ और ‘सर्वे’ की बातें कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े लाशें बिछा रहे हैं। रोशनी की मौत केवल एक हत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज में बढ़ते आक्रोश और गिरती कानून-व्यवस्था का एक और सबूत है।
आधी रात का वो सन्नाटा और ‘मौत’ की आहट
घटना शुक्रवार रात करीब एक बजे की है। पूरा भेलवा गांव गहरी नींद में सोया था। रौशनी कुमारी और उनके पति छैला बिहारी अपने घर के अंदर सो रहे थे। तभी अचानक बाहर कुछ संदिग्ध आहट हुई। छैला बिहारी ने जब बाहर झांककर देखा, तो उनके होश उड़ गए। कई हथियारबंद बदमाश घर को घेर रहे थे।
खौफ इस कदर था कि छैला बिहारी को लगा कि अगर वह वहां रुके, तो मारे जाएंगे। अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्होंने शोर मचाया और अपनी जान बचाने के लिए छत के रास्ते नीचे कूद गए और अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। लेकिन उनकी यह ‘मजबूरी’ उनकी पत्नी के लिए काल बन गई।
अकेली रोशनी और बदमाशों की हैवानियत
पति के भागने के बाद घर में रोशनी अकेली रह गई थी। बदमाशों ने घर के अंदर प्रवेश किया और सीधे रोशनी पर टूट पड़े। बताया जा रहा है कि रोशनी ने संघर्ष की कोशिश की होगी, लेकिन दरिंदों के हाथ में चमकते चाकुओं के आगे वह बेबस थी। बदमाशों ने रोशनी की गर्दन पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए। वार इतने गहरे और इतने ज्यादा थे कि रोशनी ने बिस्तर पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
शनिवार सुबह जब पुलिस मौके पर पहुँची, तो कमरे का दृश्य हृदयविदारक था। चारों तरफ खून फैला था और 28 साल की एक ऊर्जावान महिला की लाश बेजान पड़ी थी।
एसडीपीओ का खुलासा: “पुराना है जमीन का विवाद”
घटना की सूचना मिलते ही सिमरीबख्तियारपुर एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने घटनास्थल का मुआयना किया और मृतका के पति व ग्रामीणों से पूछताछ की।
एसडीपीओ ने बताया, “प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से जमीन विवाद से जुड़ा लग रहा है। कुछ दिनों पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसे लेकर तनाव बना हुआ था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान कर रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”
VOB का नजरिया: क्या ‘छत से कूदना’ ही एकमात्र विकल्प था?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि इस हत्याकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- सुरक्षा का संकट: क्या ग्रामीण इलाकों में अब अपराधी इतने बेखौफ हो गए हैं कि वे रात के एक बजे किसी के घर में घुसकर हत्या कर दें?
- जमीन विवाद का नासूर: सहरसा ही नहीं, पूरे बिहार में जमीन विवाद हत्याओं का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। पुलिस और अंचल कार्यालय (CO Office) समय रहते इन विवादों को क्यों नहीं सुलझाते?
- पति की भूमिका: छैला बिहारी का जान बचाने के लिए छत से कूदना उनकी जान तो बचा गया, लेकिन एक पत्नी का जो भरोसा अपने पति पर होता है, वह उस रात शायद टूट गया। क्या वे शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा नहीं कर सकते थे? हालांकि, खौफ के उस पल में इंसान का दिमाग कैसे काम करता है, यह कहना मुश्किल है।
शोक में डूबा गांव, इंसाफ की पुकार
रोशनी की मौत के बाद भेलवा गांव में मातम पसरा है। गांव की महिलाओं का कहना है कि रोशनी एक मिलनसार महिला थी। जमीन के एक टुकड़े के लिए किसी की जान ले लेना मानवता पर कलंक है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है, लेकिन रोशनी के परिवार को इंसाफ तभी मिलेगा जब वे ‘हाथ’ पकड़े जाएंगे जिन्होंने चाकू से उस मासूम का गला रेता।


