साहिबगंज-पीरपैंती रूट पर 330 ‘बिना टिकट’ यात्री धराए; 1 लाख से ज्यादा का जुर्माना वसूला, ‘रेल वन’ ऐप का बढ़ा क्रेज

HIGHLIGHTS: पटरियों पर ‘सघन’ पहरा; डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में चला महा-अभियान

  • बड़ी कार्रवाई: मालदा मंडल के बड़हरवा–साहिबगंज–पीरपैंती खंड पर शनिवार (21 मार्च) को चला विशेष टिकट जांच अभियान।
  • जुर्माना: 330 अनियमित यात्रियों से वसूले गए ₹1,06,580; रेलवे राजस्व की सुरक्षा के लिए कड़ा संदेश।
  • निशाने पर ट्रेनें: मालदा-किऊल इंटरसिटी, दानापुर-साहिबगंज और जमालपुर पैसेंजर समेत कई प्रमुख ट्रेनों में हुई सघन जांच।
  • डिजिटल इंडिया: यात्रियों को ‘RailOne App’ डाउनलोड करने की दी गई सलाह; पेपरलेस यात्रा पर जोर।
  • निरीक्षण: सीनियर डीसीएम कार्तिक सिंह ने करणपुरातो से पीरपैंती स्टेशनों के बीच यात्री सुविधाओं का लिया जायजा।

मालदा / साहिबगंज | 22 मार्च, 2026

​भारतीय रेलवे के मालदा मंडल ने बिना टिकट यात्रा करने वाले ‘मुसाफिरों’ के खिलाफ अपना सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है। शनिवार को मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के दिशा-निर्देशन में बड़हरवा–साहिबगंज–पीरपैंती रेल खंड पर एक विशेष सघन टिकट जांच अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई ने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो रेलवे को अपना ‘मुफ्त का सवारी खाना’ समझते थे। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान का मकसद केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि यात्री सुरक्षा को पुख्ता करना और रेलवे के राजस्व की रक्षा करना था।

इंटरसिटी से लेकर पैसेंजर तक—कहीं नहीं मिली ‘छूट’

​शनिवार की सुबह जैसे ही प्रमुख ट्रेनों ने साहिबगंज और पीरपैंती स्टेशनों पर दस्तक दी, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और वाणिज्य निरीक्षकों की टीम ने मोर्चा संभाल लिया। जांच अभियान के दायरे में ये प्रमुख ट्रेनें रहीं:

  1. 13409 मालदा टाउन–किऊल इंटरसिटी एक्सप्रेस
  2. 13236/13235 दानापुर–साहिबगंज इंटरसिटी एक्सप्रेस
  3. 13032 जयनगर–हावड़ा एक्सप्रेस
  4. 53416/53415 जमालपुर–साहिबगंज पैसेंजर ट्रेनें

​इन ट्रेनों के जनरल कोच से लेकर आरक्षित डिब्बों तक में टिकटों की सघन पड़ताल की गई। अभियान का नेतृत्व खुद वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) श्री कार्तिक सिंह कर रहे थे। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर सुनिश्चित किया कि कोई भी अनियमित यात्री बचकर न निकल पाए।

330 मामले और ₹1,06,580 का जुर्माना: रेलवे का ‘रेवेन्यू बूस्टर’

​इस जांच अभियान के परिणाम चौंकाने वाले रहे। टीम ने कुल 330 अनियमित यात्रा के मामले पकड़े। इनमें से कुछ यात्री बिना टिकट के थे, तो कुछ के पास गलत श्रेणी का टिकट था। कुल मिलाकर मौके पर ही 1,06,580 रुपये की जुर्माना राशि वसूली गई। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो नियमों को ताक पर रखकर यात्रा करते हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अभियानों से न केवल राजस्व बढ़ता है, बल्कि जो लोग मेहनत की कमाई से टिकट खरीदते हैं, उन्हें भी ट्रेनों में उचित स्थान मिल पाता है।

‘RailOne App’—अब लाइन में लगने का झंझट खत्म!

​जांच अभियान के दौरान केवल दंड ही नहीं दिया गया, बल्कि यात्रियों को जागरूक भी किया गया। रेलवे के अधिकारियों ने यात्रियों को ‘RailOne App’ डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया।

  • फायदा: इस ऐप के जरिए यात्री घर बैठे या स्टेशन के पास डिजिटल माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित टिकट ले सकते हैं।
  • पारदर्शिता: यह पेपरलेस यात्रा को बढ़ावा देता है और यात्रियों को टिकट काउंटर की लंबी कतारों से मुक्ति दिलाता है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक ने यात्रियों को समझाया कि डिजिटल टिकट न केवल सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है।

स्टेशन सुविधाओं का भी हुआ ‘एक्स-रे’

​जांच अभियान के साथ-साथ सीनियर डीसीएम कार्तिक सिंह ने करणपुरातो और पीरपैंती स्टेशनों के बीच यात्री सुविधाओं का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने प्लेटफॉर्म की साफ-सफाई, पीने के पानी की व्यवस्था और बैठने के इंतजामों का जायजा लिया। रेलवे की इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो यात्री टिकट के पैसे दे रहे हैं, उन्हें स्टेशन पर मूलभूत सुविधाएं भी विश्व स्तरीय मिलें।

VOB का नजरिया: क्या केवल जुर्माना ही काफी है?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि मालदा मंडल की यह सक्रियता सराहनीय है। साहिबगंज-पीरपैंती खंड पर अक्सर ‘बिना टिकट’ यात्रियों की भीड़ की शिकायतें आती रहती हैं, जिससे आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को भारी असुविधा होती है।

​हालांकि, ₹1,06,580 का जुर्माना वसूलना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन रेलवे को यह भी सोचना होगा कि पैसेंजर ट्रेनों में भारी भीड़ क्यों होती है? क्या ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है?

साथ ही, ‘RailOne App’ का प्रचार करना डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम है, पर ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट की समस्या है, वहां रेलवे को कियोस्क (Kiosk) मशीनों की संख्या बढ़ानी चाहिए। मनीष कुमार गुप्ता जी का यह अभियान यह संदेश देता है कि “नियम सबके लिए बराबर हैं”—चाहे आप लोकल पैसेंजर हों या इंटरसिटी के यात्री।

निष्कर्ष: सम्मानजनक यात्रा करें, उचित टिकट लें!

​रेलवे प्रशासन ने अंत में यात्रियों से विनम्र अनुरोध किया है कि वे हमेशा वैध टिकट के साथ ही यात्रा करें। इससे न केवल आप दंड से बचेंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भारतीय रेल की प्रगति में भी योगदान देंगे। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ भी आपसे अपील करता है कि अपनी यात्रा को सुखद और कानूनी बनाएं।

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