HIGHLIGHTS: नेशनल हाइवे पर ‘हॉरर’ शो; कहीं ‘चमत्कार’ ने बचाया तो कहीं ‘चीख-पुकार’ ने दहलाया
- चमत्कार: बिहपुर के दयालपुर में एक बाइक सवार को बचाने में 3 ट्रक (18 चक्का, 12 चक्का और छोटा ट्रक) आपस में टकराए; बाल-बाल बचे सभी चालक।
- लापरवाही: बाइक चालक की ‘रॉन्ग एंट्री’ ने हाइवे पर पैदा की अफरा-तफरी; पल भर में मलबे में तब्दील हो सकते थे वाहन।
- भीषण टक्कर: मड़वा महंत स्थान (नारायणपुर) के पास दो ट्रकों के बीच ‘आमने-सामने’ की भिड़ंत; दोनों ड्राइवर गंभीर रूप से जख्मी।
- एक्शन: झंडापुर थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार ने मलबे से निकलवाकर घायलों को भेजा मायागंज अस्पताल; घंटों बाधित रहा आवागमन।
बिहपुर/नवगछिया | 22 मार्च, 2026
बिहार की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (NH-31) पर शनिवार की शाम और रात ‘हादसों का ब्लैकआउट’ लेकर आई। बिहपुर से लेकर नारायणपुर तक के कुछ किलोमीटर के दायरे में सड़क परिवहन की ऐसी डरावनी तस्वीरें सामने आईं, जिसने राहगीरों की रूह कंपा दी। कहीं एक मासूम बाइक चालक की लापरवाही ने ‘ट्रक-ट्रायाड’ (तीन ट्रकों की भिड़ंत) करवा दी, तो कहीं दो ट्रकों के बीच हुई सीधी भिड़ंत ने खून से हाइवे को लाल कर दिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुँची ताकि आपको इन हादसों की पूरी और इन-डेप्थ रिपोर्ट दे सके।
दयालपुर का ‘मिरेकल’: एक बाइक, तीन ट्रक और बाल-बाल बची जान
शनिवार की देर शाम, जब सूरज ढल चुका था और एनएच-31 पर लाइटों का कारवां दौड़ रहा था, तभी बिहपुर के दयालपुर (निजी पेट्रोल पंप के पास) एक अजीबोगरीब हादसा हुआ। नवगछिया की ओर से तीन भारी-भरकम ट्रक—एक विशाल 18 चक्का, एक 12 चक्का और एक छोटा ट्रक—तेजी से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे।
तभी अचानक, मौत को दावत देते हुए एक बाइक चालक बिना किसी संकेत के ट्रकों के ठीक सामने आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंजर ऐसा था कि अगर ट्रक ड्राइवर ब्रेक नहीं मारते, तो बाइक सवार के शरीर का नामो-निशान मिट जाता। लेकिन इंसानियत की खातिर तीनों ट्रकों के चालकों ने एक साथ इमरजेंसी ब्रेक मारे और स्टयरिंग घुमा दी। नतीजा यह हुआ कि तीनों ट्रक आपस में ही टकरा गए। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोग पेट्रोल पंप से बाहर निकल आए।
अस्पताल नहीं, ‘ऊपर वाले’ ने बचाया: गनीमत यह रही कि इस टक्कर में ट्रकों के केबिन बुरी तरह नहीं पिचकें। अफरा-तफरी के बीच जब लोगों ने केबिन से ड्राइवरों को बाहर निकाला, तो पता चला कि किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है। स्थानीय लोगों ने तुरंत मोर्चा संभाला और वाहनों को किनारे करवाकर पुलिस को सूचना दी।
नारायणपुर में ‘आमने-सामने’ की जंग: केबिन में फंसे रहे ड्राइवर
दयालपुर के हादसे के कुछ ही समय बाद, एनएच-31 पर मड़वा महंत स्थान के पास स्थिति और भी भयावह हो गई। यहाँ बाइक की लापरवाही नहीं, बल्कि ‘स्पीड की सनक’ भारी पड़ गई। नारायणपुर के समीप दो ट्रक आपस में आमने-सामने टकरा गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ट्रकों के अगले हिस्से (केबिन) एक-दूसरे में धंस गए।
इस हादसे में दोनों ट्रकों के चालक केबिन के मलबे में फंस गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण और मड़वा महंत स्थान के श्रद्धालु मौके पर दौड़े। झंडापुर थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों चालकों को बाहर निकाला। उनकी स्थिति काफी नाजुक थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर किया गया है।
VOB डेटा चार्ट: एनएच-31 पर हुए दो हादसों का पूरा ब्योरा
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मापदंड |
हादसा-1 (दयालपुर) |
हादसा-2 (नारायणपुर) |
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समय |
शनिवार देर शाम |
शनिवार रात |
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वाहन |
3 ट्रक (18, 12 & छोटा) |
2 ट्रक (आमने-सामने) |
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कारण |
बाइक सवार की अचानक एंट्री |
सीधी भिड़ंत (स्पीड) |
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नुकसान |
केवल वाहनों की टूट-फूट |
2 चालक गंभीर घायल |
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पुलिस टीम |
बिहपुर थाना |
झंडापुर थाना (प्रशांत कुमार) |
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ताजा स्थिति |
यातायात सामान्य |
वाहन पुलिस निगरानी में |
VOB का नजरिया: क्या एनएच-31 पर ‘यमराज’ बाइक पर सवार होकर आते हैं?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि दयालपुर का हादसा बिहार के हाइवे की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहाँ छोटे वाहनों (बाइक/ऑटो) के चालकों को ‘लेन डिसिप्लिन’ का रत्ती भर भी अहसास नहीं है। एक बाइक सवार की क्षणिक लापरवाही ने तीन ट्रकों के मालिकों का लाखों का नुकसान कर दिया और न जाने कितने परिवारों के चिराग बुझने की स्थिति पैदा कर दी।
नारायणपुर का हादसा भी यह सबक देता है कि मड़वा महंत स्थान जैसे धार्मिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों के पास ‘ओवरस्पीडिंग’ मौत का वारंट है। झंडापुर थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार की मुस्तैदी की तारीफ होनी चाहिए कि उन्होंने समय रहते घायलों को मायागंज भेजा और जाम को खुलवाया, वरना एनएच-31 पर लगा जाम एम्बुलेंसों के लिए भी कब्रगाह बन जाता है।
पुलिस की जांच और सवाल: पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है। सवाल यह है कि क्या उन बाइक चालकों पर भी कार्रवाई होगी जिनकी वजह से ये ट्रक भिड़ते हैं? या फिर हमेशा की तरह ‘बड़ी गाड़ी’ वाले को ही कसूरवार मानकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
निष्कर्ष: सावधानी ही एकमात्र बचाव है!
बिहार दिवस के जश्न और त्योहारों की गहमागहमी के बीच, एनएच-31 पर ये हादसे हमें याद दिलाते हैं कि घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है। ट्रक चालकों की सूझबूझ ने दयालपुर में तो जान बचा ली, लेकिन नारायणपुर जैसी टक्करें हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि हाइवे पर अब ‘संयम’ की गति सबसे धीमी क्यों है?


