
HIGHLIGHTS: रक्षक की ‘अंतिम’ विदाई; थाने में जवानों ने दी ‘अंतिम सलामी’
- दुखद अंत: बिहपुर थाने में कार्यरत होमगार्ड जवान अशोक पासवान (58 वर्ष) का निधन।
- कारण: शुक्रवार रात अचानक बिगड़ी थी तबीयत; ‘ब्रेन हेमरेज’ बना मौत की वजह।
- शोक: बेगूसराय के बखरी निवासी अशोक के जाने से पुलिस महकमे और परिवार में कोहराम।
- सिमरिया घाट: गंगा के तट पर नम आंखों से किया गया जांबाज सिपाही का अंतिम संस्कार।
भागलपुर/बिहपुर | 22 मार्च, 2026
बिहार पुलिस की चौखट से एक बार फिर गमगीन खबर सामने आई है। भागलपुर जिले के बिहपुर थाने में आज सन्नाटा पसरा है और हर जवान की आंखें नम हैं। शुक्रवार की रात, जब पूरा इलाका सो रहा था, तब जनता की सुरक्षा में तैनात एक होमगार्ड जवान अपनी जिंदगी की जंग हार गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) को मिली जानकारी के अनुसार, बिहपुर थाने में अपनी सेवाएं दे रहे होमगार्ड अशोक पासवान का असामयिक निधन हो गया है। 58 साल की उम्र में उनका इस तरह जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरी पुलिस बिरादरी के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
शुक्रवार की वो काली रात: कैसे बिगड़ी अशोक की तबीयत?
घटना शुक्रवार रात की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों और साथी जवानों के अनुसार, रात के समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें सिर में तेज दर्द और भारी बेचैनी की शिकायत हुई। इससे पहले कि उन्हें किसी बड़े अस्पताल में ले जाकर बेहतर इलाज दिया जाता, उन्हें ‘ब्रेन हेमरेज’ ने अपनी चपेट में ले लिया।
थानाध्यक्ष संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि जैसे ही उनकी स्थिति खराब हुई, तुरंत सहायता के प्रयास किए गए और उनके परिजनों को सूचना दी गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अशोक पासवान ने दम तोड़ दिया। यह खबर जैसे ही पुलिस विभाग में फैली, शोक की लहर दौड़ गई।
बेगूसराय का वो बेटा, जो बिहपुर का रक्षक था
मृतक अशोक पासवान मूल रूप से बेगूसराय जिले के बखरी थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। वे घरारा पंचायत के वार्ड नंबर 10 के निवासी थे। 58 वर्ष की आयु में भी उनका जज्बा किसी युवा सिपाही से कम नहीं था। उनके साथियों का कहना है कि अशोक हमेशा अनुशासन के साथ अपनी ड्यूटी करते थे। उनके पीछे उनका पूरा परिवार और बेटा सौरभ कुमार है, जो अब अपने पिता की यादों के सहारे अपनी जिंदगी आगे बढ़ाएगा।
थाना परिसर में ‘नम आंखों’ से दी गई श्रद्धांजलि
अशोक पासवान के निधन के बाद शनिवार को बिहपुर थाना परिसर में एक भावुक कर देने वाला दृश्य दिखा। थानाध्यक्ष संतोष कुमार शर्मा के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने अपने साथी को श्रद्धांजलि अर्पित की। खाकी वर्दी में तैनात जवानों ने पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। थानाध्यक्ष ने कहा, “अशोक पासवान एक कर्तव्यनिष्ठ सिपाही थे। उनके जाने से हमने एक समर्पित साथी खो दिया है।”
सिमरिया घाट पर अंतिम सफर: बेटे सौरभ ने दी मुखाग्नि
थाने में श्रद्धांजलि देने के बाद अशोक पासवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास बेगूसराय ले जाया गया। उनके बेटे सौरभ कुमार ने बताया कि पिता का अंतिम संस्कार बेगूसराय के प्रसिद्ध सिमरिया घाट पर किया जा रहा है। गंगा के तट पर जब सौरभ ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
VOB का नजरिया: क्या रक्षकों की सेहत पर ध्यान देने का समय आ गया है?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि अशोक पासवान की मौत हमें उन हजारों होमगार्ड्स और पुलिसकर्मियों की स्थिति की याद दिलाती है जो बिना किसी शिकायत के 24×7 ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। 58 साल की उम्र में भी रात-रात भर जागकर सेवा देना शरीर पर भारी पड़ता है। क्या विभाग को अपने इन फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए नियमित ‘हेल्थ चेकअप’ की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए? अशोक पासवान ने अपनी आखिरी सांस तक बिहार की कानून व्यवस्था को संभाले रखा, अब सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके परिवार को बेसहारा न छोड़ा जाए।


