होटल, ढाबों और छोटे उद्योगों को बड़ी राहत! केंद्र ने कमर्शियल LPG का कोटा बढ़ाकर किया 50%; सचिव डॉ. नीरज मित्तल का राज्यों को ‘स्पेशल लेटर’

HIGHLIGHTS: रसोई से लेकर रेस्टोरेंट तक लौटेगी रौनक; गैस संकट के बीच केंद्र का ‘बड़ा मास्टरस्ट्रोक’

  • बड़ी खबर: भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) का कोटा सीधे 50% तक कर दिया है।
  • डेडलाइन: नई व्यवस्था 23 मार्च 2026 से लागू होगी; संकट के पहले वाले स्तर (Pre-crisis level) की आधी सप्लाई बहाल।
  • प्रायोरिटी सेक्टर: रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, डेयरी और प्रवासी मजदूरों के लिए छोटे सिलेंडर (5kg FTL) को मिलेगी प्राथमिकता।
  • शर्तें लागू: कमर्शियल एलपीजी लेने के लिए ओएमसी (OMC) में रजिस्ट्रेशन और पीएनजी (PNG) के लिए आवेदन करना अब अनिवार्य।

नई दिल्ली / पटना | 22 मार्च, 2026

​बिहार समेत पूरे देश में चल रहे कमर्शियल गैस संकट के बीच एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी के आवंटन में भारी बढ़ोतरी का फैसला लिया है। मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक ‘अर्द्ध-शासकीय पत्र’ (DO Letter) लिखकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) के पास इस पत्र की एक्सक्लूसिव जानकारी है, जो सीधे तौर पर आपके कारोबार और जेब पर असर डालेगी।

होटल, ढाबों और छोटे उद्योगों को बड़ी राहत! केंद्र ने कमर्शियल LPG का कोटा बढ़ाकर किया 50%; सचिव डॉ. नीरज मित्तल का राज्यों को 'स्पेशल लेटर'

कोटा का ‘गणित’: 30% से सीधे 50% पर पहुँची सप्लाई

​डॉ. नीरज मित्तल ने अपने पत्र (DO No. L-16016/6//2026-GP-I) में स्पष्ट किया है कि इससे पहले राज्यों को कमर्शियल गैस का 20% कोटा दिया जा रहा था, जिसे सुशासन और पीएनजी विस्तार के सुधारों के आधार पर 10% और बढ़ाया गया था। अब, 23 मार्च 2026 से राज्यों को अतिरिक्त 20% कोटा और आवंटित किया जा रहा है। इसका मतलब है कि अब राज्यों के पास संकट पूर्व (Pre-crisis) स्तर का कुल 50% आवंटन उपलब्ध होगा।

​यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार के भागलपुर और पटना जैसे शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग और किल्लत की खबरें लगातार सुर्खियां बन रही थीं। 50% कोटा बहाल होने से उम्मीद जताई जा रही है कि अब होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को गैस के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा।

किसे मिलेगी प्राथमिकता? सरकार का ‘प्रायोरिटी चार्ट’

​मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि बढ़ा हुआ 20% कोटा हर किसी को नहीं मिलेगा। सरकार ने इसके लिए कुछ विशेष सेक्टर तय किए हैं जिन्हें प्राथमिकता (Priority) दी जाएगी:

  1. फूड सेक्टर: रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल और औद्योगिक कैंटीन।
  2. डेयरी और फूड प्रोसेसिंग: दूध और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां।
  3. सरकारी रसोई: राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित रियायती कैंटीन और सामुदायिक रसोई।
  4. प्रवासी मजदूर: प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले एफटीएल (FTL) सिलेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि उनका चूल्हा जलता रहे।

​सचिव ने यह भी हिदायत दी है कि इस बढ़े हुए कोटे की ‘डायवर्जन’ (दुरुपयोग) न हो, इसके लिए कड़ी निगरानी रखी जाए।

तीन सख्त शर्तें: बिना इसके नहीं मिलेगी ‘गैस’

​अगर आप कमर्शियल या इंडस्ट्रियल उपभोक्ता हैं, तो केंद्र सरकार ने आपके लिए तीन बड़ी शर्तें रखी हैं, जिनका पालन किए बिना आप इस 50% कोटे का लाभ नहीं ले पाएंगे:

  1. OMC रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: सभी कमर्शियल ग्राहकों को तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास पंजीकरण कराना होगा। कंपनियां अब ग्राहकों का डेटाबेस बनाएंगी कि वे किस सेक्टर में हैं और उन्हें साल भर में कितने वजन की एलपीजी की जरूरत है।
  2. PNG के लिए आवेदन: भविष्य में गैस संकट को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार अब ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ (PNG) पर जोर दे रही है। एलपीजी लेने के लिए ग्राहकों को अपने शहर की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्था के पास पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा।
  3. तैयारी की स्थिति (Readiness): ग्राहकों को केवल आवेदन ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें पीएनजी प्राप्त करने के लिए अपनी यूनिट को तैयार (State of Readiness) भी करना होगा।

VOB नजरिया: क्या ‘मिशन 50%’ से खत्म होगी कालाबाजारी?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि सचिव डॉ. नीरज मित्तल का यह पत्र बिहार के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हो सकता है। भागलपुर में हाल ही में जिला प्रशासन ने गैस सिलेंडरों के बैकलॉग को खत्म करने के लिए ‘धावा दल’ बनाया था, और अब केंद्र के इस फैसले से प्रशासन के हाथ और मजबूत होंगे।

​सबसे महत्वपूर्ण बात प्रवासी मजदूरों के लिए 5kg FTL सिलेंडर का प्रावधान है। बिहार जैसे राज्य में, जहाँ बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे जिलों से आकर काम करते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था संजीवनी से कम नहीं है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती PNG ट्रांजिशन की है। बिहार के कई जिलों में अभी तक पीएनजी की पाइपलाइन पूरी तरह नहीं बिछी है। ऐसे में ‘रेडीनेस’ वाली शर्त छोटे दुकानदारों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। सरकार को चाहिए कि कोटा बढ़ाने के साथ-साथ पीएनजी इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी तेजी लाए।

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