
HIGHLIGHTS: ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत जिलाधिकारी ने कसी कमर; जनता को मिली बड़ी राहत
- मिशन मोड: ‘7 निश्चय-3’ के तहत सबका सम्मान-जीवन आसान (Ease of Living) को धरातल पर उतारने के लिए DM डॉ. नवल किशोर चौधरी ने की जनसुनवाई।
- वन-टू-वन सुनवाई: जिलाधिकारी ने खुद अपने कार्यालय कक्ष में करीब 60 फरियादियों की समस्याओं को आमने-सामने बैठकर सुना।
- डिजिटल हंटर: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए सभी क्षेत्रीय अधिकारी सीधे जुड़े; लापरवाही मिलने पर DM ने फोन पर ही ‘क्लास’ ली।
- जवाबदेही तय: DM ने अधिकारियों को दो टूक कहा— “अगर जमीनी स्तर के मामले मेरे पास आ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप काम नहीं कर रहे।”
भागलपुर | 20 मार्च, 2026
बिहार में सुशासन की नई इबारत लिखने के लिए शुरू किए गए ‘7 निश्चय पार्ट-3’ का असर अब भागलपुर की सड़कों और दफ्तरों में दिखने लगा है। शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ मुहिम के तहत एक अनूठी पहल की। उन्होंने न केवल जनता की फाइलें देखीं, बल्कि अधिकारियों की ‘वर्किंग स्टाइल’ को भी सीधे निशाने पर लिया।
अधिकारियों के लिए ‘खतरे की घंटी’: ग्राउंड पर जाना होगा!
जिलाधिकारी ने प्रेस को संबोधित करते हुए एक बेहद अहम बात कही, जो जिले के भ्रष्ट या सुस्त अधिकारियों के लिए किसी ‘वार्निंग’ से कम नहीं है।
- फिल्टर सिस्टम: DM ने साफ कर दिया कि जो मामले ब्लॉक या अंचल स्तर पर सुलझ जाने चाहिए, वे जिला मुख्यालय तक नहीं आने चाहिए।
- कड़ा निर्देश: उन्होंने क्षेत्रीय पदाधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि अनावश्यक मामलों का मेरे पास आना आपकी ‘अक्षमता’ का प्रमाण माना जाएगा।
- नतीजा: इस सख्ती का असर यह हुआ है कि अब ग्राउंड लेवल पर अधिकारी काम करने को मजबूर हैं, जिससे DM कार्यालय में ‘बेवजह’ की भीड़ कम हुई है।
VC और फोन कॉल: ‘इंस्टेंट’ न्याय की तकनीक
जनसुनवाई के दौरान DM ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया:
- लाइव एक्शन: जैसे ही कोई आवेदन सामने आया, DM ने तुरंत VC के जरिए संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी से जवाब मांगा।
- डेडलाइन: जो मामले गंभीर या अर्जेंट थे, उनके लिए अधिकारियों को फोन कर 1 से 2 दिन के भीतर डिस्पोज करने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया।
- लोक शिकायत निवारण: लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत भी कई पेंडिंग फाइलों का निपटारा मौके पर ही किया गया।
VOB का नजरिया: क्या ‘Ease of Living’ केवल फाइलों तक सीमित रहेगी?
भागलपुर DM डॉ. नवल किशोर चौधरी का यह ‘एक्शन मोड’ स्वागत योग्य है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि ‘7 निश्चय-3’ का असली उद्देश्य तब सफल होगा जब आम आदमी को एक छोटे से काम के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
DM का यह कहना कि “मामले मेरे पास कम आ रहे हैं क्योंकि अधिकारी काम कर रहे हैं,” एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता स्थाई है? अक्सर देखा गया है कि आला अधिकारी के ढीले पड़ते ही ‘सिस्टम’ फिर से सुस्त हो जाता है। “सबका सम्मान-जीवन आसान” तभी सार्थक होगा जब ब्लॉक स्तर का कर्मचारी भी DM की तरह ही संवेदनशीलता दिखाए। भागलपुर प्रशासन की यह ‘वन-टू-वन’ सुनवाई पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है।


