मुजफ्फरपुर गोलीकांड के बाद SHO पर उठे सवाल: फायरिंग का पुराना रिकॉर्ड आया सामने

मुजफ्फरपुर | 20 मार्च 2026: मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र में हुई फायरिंग की घटना के बाद थानाध्यक्ष राजा सिंह एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। चोरनिया गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत के बाद अब उनके पुराने रिकॉर्ड को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

तीसरी बार फायरिंग का मामला आया सामने

सूत्रों के अनुसार, राजा सिंह पहले भी दो अलग-अलग घटनाओं में सरकारी हथियार से फायरिंग कर चुके हैं। ऐसे में गायघाट की घटना को मिलाकर यह तीसरा मामला बताया जा रहा है, जब उनके द्वारा गोली चलाने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि एक मामले में उन्होंने खुद अपने बयान में फायरिंग की बात स्वीकार करते हुए सनहा भी दर्ज कराया था।

कांस्टेबल से थानेदार तक का सफर

राजा सिंह का करियर बिहार पुलिस में कांस्टेबल पद से शुरू हुआ था। बाद में उन्होंने 2019 में दारोगा परीक्षा पास की और 2020 में मुजफ्फरपुर में उनकी पोस्टिंग हुई। कुछ ही वर्षों में उनकी कार्यशैली, खासकर सख्त रवैये को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

पहली घटना: शराबबंदी कार्रवाई के दौरान फायरिंग

पहला मामला करियात थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जाता है, जहां शराबबंदी कानून के उल्लंघन की सूचना पर कार्रवाई के दौरान उन्होंने फायरिंग की थी। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई थी।

दूसरी घटना: सड़क हादसे के बाद तनाव

दूसरी घटना 20 मई 2025 को औराई थाना क्षेत्र में हुई थी। एक सड़क दुर्घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पुलिस के अनुसार, भीड़ के उग्र होने और हमले की स्थिति में उन्होंने आत्मरक्षा के लिए एक राउंड फायरिंग की थी।

तीसरी घटना: गायघाट में मौत से बढ़ा विवाद

सबसे ताजा और गंभीर मामला गायघाट थाना क्षेत्र का है। पुलिस टीम एक आरोपी को पकड़ने के लिए छापेमारी करने गई थी, लेकिन वहां ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और पथराव शुरू हो गया।

पुलिस का कहना है कि हालात बेकाबू होने पर आत्मरक्षा में फायरिंग की गई, लेकिन इस दौरान एक व्यक्ति को गोली लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी बात सामने आई है।

पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि क्या हर बार फायरिंग ही एकमात्र विकल्प था या हालात को संभालने के अन्य तरीके भी अपनाए जा सकते थे।

विभाग में भी मंथन, जांच जारी

घटना के बाद पुलिस विभाग के अंदर भी इस मामले को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। वहीं स्थानीय लोगों में आक्रोश है और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर का यह मामला सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की जवाबदेही और कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन गया है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों पर है, जिससे यह साफ हो सके कि फायरिंग की परिस्थितियां क्या थीं और आगे क्या कार्रवाई होगी।

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