खाकी पर उठे सवाल: मुजफ्फरपुर कांड में SHO समेत 8 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, CID को सौंपी गई जांच

मुजफ्फरपुर | 20 मार्च 2026: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र स्थित चोरनी गांव में हुई संदिग्ध मौत के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए जांच को CID को सौंप दिया है। साथ ही कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष (SHO) समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

छापेमारी के दौरान हुई घटना, मौत के बाद बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब पुलिस टीम चोरनी गांव में छापेमारी के लिए पहुंची थी। इसी दौरान हालात बिगड़ गए और एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई और एक व्यक्ति की जान चली गई। इस आरोप के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।

SHO समेत 8 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गायघाट थानाध्यक्ष राजा सिंह सहित कुल 8 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। इसके अलावा संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है।

यह कदम प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाने के तौर पर देखा जा रहा है।

पुलिस ने भी दर्ज किया केस

दूसरी ओर, पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस टीम पर हमला करने के आरोप में दो नामजद और करीब 15 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

इस तरह यह मामला अब दोतरफा कानूनी कार्रवाई का रूप ले चुका है, जहां दोनों पक्षों पर आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।

CID और मजिस्ट्रेट जांच साथ-साथ

मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच CID को सौंपी गई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेट जांच कराने का भी निर्णय लिया है।

प्रशासन का मानना है कि दो स्तरों पर जांच होने से सच्चाई सामने आने में मदद मिलेगी और किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहेगी।

सोशल मीडिया पर अफवाहों पर सख्ती

घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई भ्रामक और भड़काऊ खबरें तेजी से वायरल होने लगीं। इसे देखते हुए पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है।

अब तक आधा दर्जन से अधिक सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी खबर को साझा न करें।

“कानून से ऊपर कोई नहीं”

एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने साफ कहा कि कानून सबके लिए समान है। चाहे पुलिसकर्मी हों या आम नागरिक, किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गांव में हालात नियंत्रण में

घटना के बाद चोरनी गांव में तनाव का माहौल बना हुआ था, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर की यह घटना एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर CID जांच और मजिस्ट्रेट रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी।

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