मुंगेर में CM के जाते ही ‘सब्जी लूट’ कांड! सजी-धजी रंगोली से आलू-प्याज ले भागे लोग; ‘साहब’ ने भी बैग में भरी सब्जियां, वीडियो वायरल

HIGHLIGHTS: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद ‘अजीबोगरीब’ लूट; अनुशासन की उड़ी धज्जियां

  • हंगामा बरपा: गुरुवार को मुंगेर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के समापन के तुरंत बाद अफरा-तफरी का माहौल।
  • रंगोली का ‘अंजाम’: कृषि स्टॉल पर सब्जियों से बनाई गई खूबसूरत कलाकृति (रंगोली) को लोगों ने तहस-नहस कर दिया।
  • साहब भी कतार में: आम जनता तो दूर, एक सरकारी अधिकारी भी ‘मुफ्त’ की सब्जी समेटते कैमरे में कैद।
  • वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर ‘सब्जी लूट’ का वीडियो तेजी से हो रहा है ट्रेंड; प्रशासन की हो रही किरकिरी।

मुंगेर | 20 मार्च, 2026

​मुंगेर में गुरुवार को मुख्यमंत्री का भव्य कार्यक्रम जितनी ‘सुर्खियों’ में था, उससे कहीं ज्यादा चर्चा कार्यक्रम खत्म होने के बाद के ‘नजारे’ की हो रही है। जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला रवाना हुआ, वहां मौजूद भीड़ सीधे कृषि विभाग के स्टॉलों पर टूट पड़ी। प्रदर्शनी के लिए सजाकर रखे गए आलू, प्याज, बैंगन और टमाटर कुछ ही मिनटों में गायब हो गए।

अनुशासन फेल: जब ‘सजावट’ बन गई ‘सौदा’

​मुंगेर के इस सरकारी कार्यक्रम में कृषि विभाग ने किसानों की मेहनत और राज्य की पैदावार दिखाने के लिए सब्जियों की एक शानदार रंगोली बनवाई थी।

  • भीड़ का प्रहार: कार्यक्रम खत्म होते ही वहां मौजूद लोगों ने रंगोली में सजे आलू और प्याज को उठाना शुरू कर दिया। जिसे जो मिला, वह लेकर भागने लगा।
  • अधिकारी की ‘मदद’: वायरल वीडियो में एक वर्दीधारी या अधिकारी (पहचान गुप्त) भी अपनी जेबें और बैग सब्जियों से भरते नजर आ रहे हैं। यह देख लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब रक्षक ही भक्षक (लूट में शामिल) बन जाए, तो जनता को कौन रोके?

VOB का नजरिया: क्या ‘मुफ्तखोरी’ की मानसिकता विकास पर भारी है?

​मुंगेर की यह घटना केवल ‘सब्जी लूट’ नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और प्रशासनिक अनुशासन की पोल खोलती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि मुख्यमंत्री जिस विकास और ‘समृद्धि’ का संदेश देने मुंगेर आए थे, उसकी चमक इन तस्वीरों ने धुंधली कर दी है।

​हैरानी की बात यह है कि जहाँ भारी पुलिस बल और अधिकारी तैनात थे, वहां सरेआम लूट मची रही। सबसे शर्मनाक पहलू उस अधिकारी का वीडियो है, जो जनता को रोकने के बजाय खुद आलू-प्याज चुनने में लगा था। क्या हम इतने ‘कंगाल’ हो गए हैं कि सरकारी प्रदर्शनी की रंगोली भी नहीं छोड़ सकते? प्रशासन को न केवल उन लोगों की पहचान करनी चाहिए, बल्कि उस अधिकारी पर भी कार्रवाई करनी चाहिए जिसने ‘वर्दी’ और ‘पद’ की गरिमा को सब्जी के थैले में डाल दिया।

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