भागलपुर के ‘विक्रमशिला सेतु’ की सांसें अटकीं! 40 हजार गाड़ियों के बोझ से कराह रहा पुल; पिलर के ‘प्रोटेक्शन वॉल’ भी ढहे?

HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी की ‘लाइफलाइन’ पर मंडराया खतरा; पिलर नंबर 17, 18 और 19 सबसे ज्यादा डैमेज

  • भारी दबाव: रोजाना करीब 35 से 40 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजर रहे हैं, जिससे सेतु की संरचना पर बुरा असर पड़ रहा है।
  • खस्ताहाल ढांचा: पुल की सड़क टूटकर बिखर रही है, रेलिंग कई जगह से गायब है और एक्सपेंशन ज्वाइंट्स की दरारें डराने लगी हैं।
  • पिलर पर चोट: गंगा की तेज लहरों ने पिलर नंबर 17, 18 और 19 के सुरक्षा घेरे (प्रोटेक्शन वॉल) को तहस-नहस कर दिया है।
  • मेंटीनेंस में देरी: पिछले 10 वर्षों से पुल की कोई समग्र (मेजर) मरम्मत नहीं हुई है; एनएचएआई और पुल निर्माण निगम के बीच तालमेल की कमी।

भागलपुर | 20 मार्च, 2026

​उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला भागलपुर का गौरव ‘विक्रमशिला सेतु’ इस समय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मरम्मत के अभाव और क्षमता से अधिक वाहनों के बोझ ने इस पुल को ‘इमरजेंसी वार्ड’ में लाकर खड़ा कर दिया है। स्थिति यह है कि गंगा की धारा पिलर की नींव को कमजोर कर रही है और पुल के ऊपर की सड़कें कंक्रीट के ढेर में तब्दील हो रही हैं।

पिलर 17, 18 और 19: जहाँ खतरा सबसे ज्यादा

​पुल के नीचे का हिस्सा इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है:

  • दीवारें धराशायी: बिजली के पोल नंबर 50 से 65 के बीच स्थित पिलर नंबर 17, 18 और 19 के प्रोटेक्शन वॉल बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं।
  • उखड़ गया सुरक्षा कवच: एक वॉल पूरी तरह बह गई है, दूसरी आधी टूट चुकी है और तीसरी टेढ़ी होकर किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है।
  • रेलिंग का नामोनिशान नहीं: पुल के ऊपर कई जगहों पर सुरक्षा रेलिंग टूट चुकी है, जिससे रात के समय बड़े हादसे का डर बना रहता है।

सरकारी दलील: रिपोर्ट तैयार, समानांतर पुल से उम्मीद

​बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (BRPNNL) के सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर ज्ञानचंद दास के अनुसार:

  1. जिम्मेदारी का फेर: पुल के मेंटेनेंस की मुख्य जिम्मेदारी एनएच प्रशासन और एनएचएआई (NHAI) की है।
  2. जांच शुरू: एनएच प्रशासन की रिपोर्ट के बाद अब पुल की वस्तुस्थिति की फिर से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
  3. नया पुल: राहत की बात यह है कि विक्रमशिला सेतु के समानांतर दूसरे पुल का काम तेजी से चल रहा है, जिसके बाद पुराने पुल पर दबाव कम होगा।

VOB का नजरिया: क्या ‘दूसरे पुल’ के इंतजार में गिर जाएगा पुराना सेतु?

​विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र और सीमांचल की ‘धड़कन’ है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि 10 साल तक मेजर रिपेयर न होना प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है। 40 हजार वाहनों का दबाव झेल रहे इस पुल के पिलर अगर कमजोर हो रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर हजारों जिंदगियों से खिलवाड़ है।

​समानांतर पुल बनने में अभी समय है, लेकिन पुराने पुल की सेहत ‘क्रिटिकल’ हो चुकी है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? केवल ‘रिपोर्ट तैयार’ करने से पिलर की दरारें नहीं भरेंगी। जरूरत है युद्धस्तर पर पिलर प्रोटेक्शन और सड़क मरम्मत की, ताकि भागलपुर और उत्तर बिहार का यह संपर्क सूत्र सलामत रहे।

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