भागलपुर: कृषि प्रधान राज्य बिहार में खेती के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग और तकनीकी विकास हो रहे हैं, लेकिन इनका पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण कृषि उत्पादों के लिए मजबूत बाजार व्यवस्था (मार्केट लिंक) का अभाव है।
अनुसंधान तो हो रहा, लेकिन किसानों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ
भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर लगातार नए अनुसंधान किए जा रहे हैं।
- नई फसलें विकसित की गई हैं
- आधुनिक तकनीक तैयार की गई है
- कई उत्पादों का पेटेंट भी कराया गया है
इसके बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र की गति प्रभावित हो रही है।
बंपर उत्पादन के बाद भी उचित दाम नहीं
डॉ. सिंह ने बताया कि अक्सर किसान यह सवाल उठाते हैं कि जब उत्पादन अच्छा होता है, तब भी बाजार में उन्हें सही कीमत क्यों नहीं मिलती।
इस स्थिति के कारण किसानों का मनोबल कमजोर होता है और वे नई तकनीकों को अपनाने में हिचकिचाते हैं।
सरकार और वैज्ञानिकों के बीच समन्वय जरूरी
उन्होंने हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेले के दौरान राज्य के कृषि मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा भी की।
उन्होंने सुझाव दिया कि—
- बीज से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत किया जाए
- कृषि वैज्ञानिकों, सरकार और उद्योग विभाग के बीच बेहतर तालमेल बने
- योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे
छोटे कृषि उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत
डॉ. सिंह ने कहा कि बिहार में कृषि आधारित लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।
- इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन संभव होगा
1.55 लाख करोड़ के रोडमैप का सही उपयोग जरूरी
उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने कृषि विकास के लिए करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
इस राशि का एक हिस्सा कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन और छोटे उद्योगों के विकास में लगाया जाना चाहिए, ताकि किसान सीधे बाजार से जुड़ सकें।
वैल्यू एडिशन से बदलेगी तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि उत्पादों के साथ वैल्यू एडिशन जोड़ा जाए, तो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष:
बिहार में कृषि विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को बाजार से जोड़ना और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना भी उतना ही जरूरी है। मजबूत मार्केट लिंक और वैल्यू एडिशन के जरिए ही कृषि क्षेत्र में वास्तविक बदलाव संभव है।


