“बिहार में बेटियां संकट में, भ्रष्टाचार चरम पर!”— तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर ‘फ्रंटल’ अटैक; गैस की लाइनों और युवाओं के भविष्य पर उठाए सवाल

HIGHLIGHTS: नेता प्रतिपक्ष का सरकार के खिलाफ ‘चार्जशीट’; विकास और सुरक्षा पर घेरा

  • सुरक्षा पर सवाल: तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप— “बिहार में आज बेटियां सुरक्षित नहीं, हर तरफ मार-काट मची है।”
  • करप्शन का ‘पीक’: नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य के हर विभाग में भ्रष्टाचार अब अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
  • दिशाविहीन सरकार: तेजस्वी के अनुसार, सरकार की गलत नीतियों ने बिहार को विकास के हर पैमाने पर सबसे नीचे धकेल दिया है।
  • गैस की किल्लत: “रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी जनता घंटों लाइन में खड़ी है”— सरकार की विफलता का प्रमाण।

पटना | 20 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति में ‘जंगलराज’ बनाम ‘कुशासन’ की जंग एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गुरुवार (19 मार्च) को एक कड़ा बयान जारी कर राज्य सरकार की नीतियों और नीयत पर तीखे प्रहार किए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून का राज खत्म हो चुका है और आम आदमी, खासकर महिलाएं और युवा, खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

“युवा सशंकित और महिलाएं आशंकित” — तेजस्वी का हमला

​तेजस्वी यादव ने अपने बयान में बिहार की वर्तमान स्थिति का एक ‘अंधेरा’ खाका पेश किया:

  1. कानून-व्यवस्था: उन्होंने दावा किया कि सरेआम हो रही हिंसा ने राज्य में भय का माहौल बना दिया है। बेटियों की सुरक्षा अब एक बड़ा संकट बन गई है।
  2. भ्रष्टाचार का बोलबाला: तेजस्वी के मुताबिक, बिना ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) के किसी भी विभाग में कोई काम नहीं हो रहा है।
  3. भविष्य पर संकट: उन्होंने कहा कि बिहार का युवा अपने करियर को लेकर अनिश्चितता में है। सरकार के पास उन्हें रोजगार देने या प्रदेश को दिशा देने का कोई ठोस प्लान नहीं है।

रसोई गैस की ‘कतार’ बनी सियासी हथियार

​हाल के दिनों में राज्य में गैस सिलेंडरों के वितरण में आई दिक्कतों और लंबी लाइनों को तेजस्वी ने सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बताया। उन्होंने कहा कि जो सरकार लोगों को समय पर रसोई गैस नहीं दे सकती, उसे विकास की बात करने का कोई हक नहीं है।

VOB का नजरिया: क्या ‘आंकड़ों’ और ‘एहसासों’ की जंग में पिछड़ रही है सरकार?

​तेजस्वी यादव का यह हमला उस समय आया है जब सरकार हाल ही में संपन्न ‘समृद्धि यात्रा’ और नए निवेश (जैसे अल्ट्राटेक और सोलर प्लांट) के जरिए अपनी ‘विकास पुरुष’ की छवि को चमकाने में जुटी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि तेजस्वी यादव ने ‘कानून-व्यवस्था’ और ‘भ्रष्टाचार’ जैसे संवेदनशील मुद्दों को छेड़कर सरकार के विकास के दावों की हवा निकालने की कोशिश की है।

​हालांकि, सरकार ने गैस संकट को लेकर मुख्य सचिव स्तर की बैठक (जैसा कि कल की प्रेस विज्ञप्ति में था) कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है, लेकिन तेजस्वी की यह टिप्पणी सीधे तौर पर आम आदमी की ‘रसोई’ और ‘सुरक्षा’ से जुड़ी है। राजनीति में ‘परसेप्शन’ (धारणा) की लड़ाई बहुत अहम होती है—क्या जनता को ‘सोलर प्लांट’ दिख रहे हैं या ‘गैस की लाइन’? आगामी दिनों में यह बहस और तीखी होगी।

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