बांका के कटोरिया में बरसेगा ‘निवेश का सोना’! अल्ट्राटेक लगाएगी ₹1200 करोड़ की सीमेंट फैक्ट्री; 1000 युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार

HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी के बाद अब बांका बनेगा ‘इंडस्ट्रियल हब’; बिहार में निवेश की बड़ी छलांग

  • मेगा निवेश: देश की दिग्गज कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट बिहार में ₹1200 करोड़ का भारी-भरकम निवेश करेगी।
  • रोजगार की बहार: इस प्रोजेक्ट से लगभग 1000 लोगों को प्रत्यक्ष (Direct) रोजगार मिलने का रास्ता साफ।
  • लोकेशन फाइनल: बांका जिले के कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में 59.47 एकड़ भूमि पर लगेगी भव्य सीमेंट यूनिट।
  • बदलेगी सूरत: उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने दी जानकारी; लॉजिस्टिक्स और निर्माण क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार।

पटना/बांका | 20 मार्च, 2026

​बिहार के औद्योगिक परिदृश्य (Industrial Landscape) में आज एक बड़ा अध्याय जुड़ गया है। राज्य सरकार की ‘परियोजना स्वीकृति समिति’ ने बांका के कटोरिया में अल्ट्राटेक सीमेंट की नई फैक्ट्री को हरी झंडी दे दी है। उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के विजन को धरातल पर उतारते हुए विभाग ने न केवल जमीन आवंटित की है, बल्कि निवेश को ‘फास्ट ट्रैक’ मोड में डाल दिया है।

कटोरिया बनेगा ‘सीमेंट सिटी’: 60 एकड़ में फैलेगा कारोबार

​उद्योग सचिव सह बियाडा (BIADA) के एमडी कुंदन कुमार के अनुसार, यह निवेश बिहार की बढ़ती औद्योगिक लहर का हिस्सा है:

  1. जमीन का आवंटन: बियाडा ने कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में 59.47 एकड़ भूमि इस फैक्ट्री के लिए चिह्नित की है।
  2. आर्थिक चक्र: सीमेंट फैक्ट्री आने से केवल बोरे नहीं भरेंगे, बल्कि ट्रक ट्रांसपोर्ट (Logistics), स्थानीय ढाबा, मरम्मत की दुकानें और छोटे सप्लायर्स की चांदी हो जाएगी।
  3. बुनियादी ढांचा: यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में सहायक होगा, जिससे सीमेंट की उपलब्धता सस्ती और सुलभ होगी।

📊 निवेश फाइल: बांका का नया ‘पावर कार्ड’

  • कुल निवेश: ₹1200 करोड़
  • प्रत्यक्ष रोजगार: 1000 युवा
  • क्षेत्रफल: ~60 एकड़ (कटोरिया)
  • प्रभावित क्षेत्र: बांका, भागलपुर और देवघर (झारखंड) सीमा से सटे इलाके।

VOB का नजरिया: क्या ‘बांका’ बनेगा बिहार का अगला ‘ग्रोथ इंजन’?

​अल्ट्राटेक का बांका आना बिहार के ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली’ होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि कटोरिया जैसे इलाके में ₹1200 करोड़ का निवेश वहां के पलायन को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा।

​अक्सर दक्षिण बिहार के जिलों को केवल खेती या पर्यटन (मन्दार/कटोरिया) के नजरिए से देखा जाता था, लेकिन अब भारी उद्योग (Heavy Industry) का आना वहां की प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाएगा। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि इन 1000 नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले और इसके लिए वहां ‘स्किल डेवलपमेंट’ के विशेष केंद्र खोले जाएं। अगर बांका में यह सफल रहा, तो पड़ोसी जिलों (मुंगेर/जमुई) के लिए भी निवेश के नए द्वार खुलेंगे।

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