HIGHLIGHTS: खाड़ी देशों में आसमान से बरसी ‘अग्नि वर्षा’; वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया
- ईरानी इंतकाम: इजरायल द्वारा पार्स गैस फील्ड पर हमले के जवाब में ईरान ने गुरुवार को कतर, सऊदी, यूएई और इजरायल के तेल अड्डों पर दागीं मिसाइलें।
- दुनिया की ‘लाइफलाइन’ पर चोट: कतर के रास लाफान (20% वैश्विक गैस सप्लाई) और कुवैत की मिना अल अहमदी (मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरी) में लगी भीषण आग।
- महंगाई का करंट: युद्ध की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 116 डॉलर प्रति बैरल के पार; पूरी दुनिया में हाहाकार।
- ऑपरेशन शटडाउन: यूएई ने हबसान और बाब गैस फील्ड का संचालन रोका; इजरायल की हाइफा रिफाइनरी को भी पहुंचा भारी नुकसान।
तेहरान/दुबई | 20 मार्च, 2026
मिडिल ईस्ट अब बारूद के ढेर पर नहीं, बल्कि धधकती हुई आग की लपटों के बीच खड़ा है। गुरुवार (19 मार्च) को ईरान ने जो ‘जवाबी प्रहार’ किया है, उसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। कतर की गैस से लेकर सऊदी के तेल तक, ईरान के ड्रोन और मिसाइलों ने खाड़ी देशों के उन ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है जो पूरी दुनिया की रगों में खून (ईंधन) दौड़ाते हैं।
तबाही का नक्शा: कहाँ-कहाँ बरसे ईरानी ड्रोन?
- कतर (रास लाफान): दुनिया को 20 फीसदी गैस देने वाला यह शहर धमाकों से दहल उठा। कई एलएनजी (LNG) संयंत्रों में उत्पादन रोकना पड़ा है।
- कुवैत (मिना अल अहमदी): मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरी, जहाँ रोजाना 7.30 लाख बैरल तेल निकलता है, वहां ईरानी ड्रोनों ने आग लगा दी।
- सऊदी अरब (समरेफ): रियाद के दक्षिण में स्थित रिफाइनरी पर मिसाइल गिरी। सऊदी रक्षा मंत्रालय अब जवाबी रणनीति बना रहा है।
- इजरायल (हाइफा): ईरान ने सीधे इजरायल की हाइफा तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया, जिससे वहां भारी नुकसान की खबर है।
ईरान की खुली धमकी: “यह तो बस शुरुआत है”
ईरान के सैन्य ऑपरेशन कमांड ‘खातम अल अनबिया’ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर फिर से इजरायली हमला हुआ, तो अगला प्रहार इससे भी ज्यादा कड़ा और विनाशकारी होगा।
VOB का नजरिया: क्या आपकी जेब पर गिरने वाली है ‘महंगाई की मिसाइल’?
मिडिल ईस्ट में लगी यह आग केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि 116 डॉलर का कच्चा तेल भारत के लिए किसी ‘आर्थिक बम’ से कम नहीं है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से पूरा करता है।
सबसे बड़ी चिंता उन लाखों बिहारियों और भारतीयों की है जो कतर, सऊदी और यूएई की इन रिफाइनरियों और शहरों में काम करते हैं। अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो न केवल भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹150 के पार जा सकते हैं, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाला ‘रेमिटेंस’ (विदेशी पैसा) भी रुक जाएगा। पीएम मोदी का ‘शांति प्रयास’ (जिसकी चर्चा हमने पहले की थी) अब भारत की मजबूरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। क्या दुनिया इस महायुद्ध को रोक पाएगी या हम तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं?


