HIGHLIGHTS: कतरीसराय में ‘मिनी जामताड़ा’ का भंडाफोड़; राजगीर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक
- बड़ी कामयाबी: राजगीर एसडीपीओ के नेतृत्व में कतरीसराय के कतरपुर और गोरैया बिगहा में छापेमारी; 5 साइबर अपराधी दबोचे गए।
- ठगी का तरीका: व्हाट्सएप पर पेट्रोल पंप डीलरशिप के फर्जी लेटर भेजकर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लाखों की चपत।
- भारी बरामदगी: 13 मोबाइल फोन, 4 फर्जी सिम और 89 पन्नों का ‘डेटा शीट’ मिला, जिसमें हजारों संभावित शिकारों के नाम दर्ज थे।
- कबूलनामा: संगठित गिरोह के रूप में काम करने वाले इन शातिरों ने पुलिस के सामने अपना जुर्म स्वीकार किया।
नालंदा | 19 मार्च, 2026
नालंदा का कतरीसराय इलाका एक बार फिर साइबर अपराध की काली सुर्खियों में है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर राजगीर एसडीपीओ की विशेष टीम ने सोमवार को कतरपुर और गोरैया बिगहा में दबिश देकर ठगी के एक बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है। ये शातिर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों के ‘बिजनेसमैन’ बनने के सपने को लूट रहे थे।
पेट्रोल पंप का झांसा और ‘प्रोसेसिंग फीस’ की लूट
पकड़े गए अपराधियों का नेटवर्क काफी संगठित था। ये लोग आम जनता को शिकार बनाने के लिए एक खास ‘स्क्रिप्ट’ पर काम करते थे:
- फर्जी लेटर: व्हाट्सएप के जरिए लोगों को लुभावने पेट्रोल पंप डीलरशिप के आवंटन पत्र भेजे जाते थे।
- रजिस्ट्रेशन का जाल: लेटर मिलने के बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पीड़ितों से बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।
- डेटा का खेल: पुलिस को मौके से 89 पन्नों का डेटा शीट मिला है, जिससे पता चलता है कि इनके निशाने पर पूरे देश के लोग थे।
गिरफ्तार अपराधियों की कुंडली
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 19 साल के युवा से लेकर 32 साल के अनुभवी ठग शामिल हैं:
- शुभम कुमार उर्फ हिमांशु (25 वर्ष): कतरपुर का रहने वाला।
- प्रिन्स कुमार उर्फ अंजनी कुमार (19 वर्ष): बजराचक निवासी।
- आदित्य राज उर्फ जेपी (25 वर्ष) और अमित कुमार (32 वर्ष): दोनों गोरैया बिगहा के निवासी।
- पियुष कुमार (22 वर्ष): अहियापुर (सरमेरा) का रहने वाला।
VOB का नजरिया: क्या कतरीसराय की ‘बदनामी’ का दाग कभी धुलेगा?
नालंदा पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन कतरीसराय जैसे इलाकों में साइबर ठगी की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि एक गिरोह पकड़े जाने पर दूसरा तैयार खड़ा मिलता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पेट्रोल पंप डीलरशिप के नाम पर ठगी एक नया ट्रेंड है, जो लोगों की लालच और जानकारी के अभाव का फायदा उठाता है।
89 पन्नों की डेटा शीट मिलना इस बात का सबूत है कि हमारे पर्सनल डेटा की सुरक्षा कितनी कमजोर है। पुलिस की छापेमारी के साथ-साथ जनता को यह समझना होगा कि व्हाट्सएप पर आया कोई भी ‘अपॉइंटमेंट लेटर’ असली नहीं होता। जब तक हम ‘बिना मेहनत के बड़ी कमाई’ के लालच में रहेंगे, तब तक ये साइबर ठग नए-नए बहाने खोजते रहेंगे। पुलिस की अपील को गंभीरता से लें—ओटीपी और बैंक जानकारी किसी अजनबी से साझा न करें।


