HIGHLIGHTS: लालटेन के युग से ‘स्मार्ट मीटर’ के लीडर तक; बिहार का ‘एनर्जी’ ट्रांसफॉर्मेशन
- ग्लोबल मंच: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में ‘फोकस स्टेट’ बना बिहार; दुनिया भर के निवेशकों ने राज्य की नीतियों में दिखाई रुचि।
- ऐतिहासिक छलांग: 2005 में मात्र 700 MW से बढ़कर आज 8,700 MW से ज्यादा बिजली की मांग पूरी कर रहा है बिहार।
- मुनाफे का करंट: ₹1,942 करोड़ के घाटे से निकलकर बिहार की डिस्कॉम्स अब ₹2,000 करोड़ के लाभ में; ‘A’ रेटिंग ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा।
- ₹81,000 करोड़ का रोडमैप: अगले 5 साल में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए टीबीसीबी (TBCB) मोड में भारी निवेश की तैयारी।
बिहार का ‘पावर’ ग्राफ: 2005 बनाम 2026
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मापदंड (Parameters) |
साल 2005 |
साल 2026 |
बदलाव / वृद्धि |
|---|---|---|---|
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उपलब्ध बिजली |
< 700 MW |
8,700+ MW |
~12 गुणा वृद्धि |
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उपभोक्ता संख्या |
सीमित |
2.2 करोड़+ |
व्यापक नेटवर्क विस्तार |
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ग्रिड सबस्टेशन |
45 |
175 |
करीब 4 गुणा वृद्धि |
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर |
शून्य |
87 लाख+ |
देश में अग्रणी |
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वित्तीय स्थिति |
भारी घाटा |
₹2,000 Cr लाभ |
ऐतिहासिक टर्नअराउंड |
₹81,000 करोड़ का ‘इन्वेस्टमेंट’ ब्रेकअप (अगले 5 साल)
बिहार सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए एक स्पष्ट और विशाल निवेश योजना पेश की है:
- पावर जनरेशन (उत्पादन): ₹38,950 करोड़ (नए प्लांट और रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स)।
- डिस्ट्रीब्यूशन (वितरण): ₹22,951 करोड़ (हर घर तक निर्बाध बिजली के लिए)।
- ट्रांसमिशन (संचारण): ₹16,194 करोड़ (ग्रिड को मजबूत करने हेतु)।
- मेंटेनेंस: ₹3,346 करोड़ (पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के रख-रखाव के लिए)।
भविष्य की तैयारी: नवीकरणीय ऊर्जा और स्टोरेज विजन 2030
बिहार अब केवल कोयले पर निर्भर नहीं रहना चाहता। ‘रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025’ के तहत राज्य ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं:
- 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा: 2030 तक सौर और अन्य स्वच्छ स्रोतों से बिजली उत्पादन का लक्ष्य।
- 6.1 GW स्टोरेज क्षमता: कजरा जैसे बैटरी स्टोरेज (BESS) प्रोजेक्ट्स से ग्रिड को स्थिरता देना।
- पंप्ड स्टोरेज: ₹13,000 करोड़ के निवेश प्रस्तावों के साथ बिहार जल-ऊर्जा के भंडारण में भी बाजी मारने को तैयार है।
- इंसेंटिव्स: सिंगल विंडो क्लीयरेंस, कार्बन क्रेडिट और ट्रांसमिशन शुल्क में छूट देकर निवेशकों के लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछाया गया है।
VOB का नजरिया: क्या बिहार बनेगा देश का ‘पावर हाउस’?
दिल्ली के यशोभूमि में बिहार पैवेलियन की भीड़ और ‘ए’ रेटिंग वाली डिस्कॉम्स यह बताने के लिए काफी हैं कि राज्य अब ‘बिजली की कमी’ वाले दाग को धो चुका है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पीरपैंती (₹30,000 करोड़) और कजरा सोलर प्रोजेक्ट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स बिहार की औद्योगिक तकदीर बदल सकते हैं।
सबसे बड़ी बात स्मार्ट मीटरिंग की है—जहाँ विकसित राज्य अब भी संघर्ष कर रहे हैं, बिहार 87 लाख मीटर लगाकर ‘डिजिटल लीडर’ बन चुका है। अब चुनौती ₹81,000 करोड़ के इस भारी-भरकम निवेश को समय पर धरातल पर उतारने की है। अगर यह प्लान सफल रहा, तो बिहार न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ऊर्जा निर्यात करने वाला राज्य भी बन सकता है।


