HIGHLIGHTS: माँ शैलपुत्री की आराधना और रामायण की चौपाइयों से महका अंग क्षेत्र
- भक्तिमय आगाज: चैत्र नवरात्र के पहले दिन भागलपुर के मंदिरों में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप ‘शैलपुत्री’ की विधि-विधान से पूजा।
- विशेष आयोजन: सुल्तानगंज के रघुचक अन्नहार शक्ति स्थल काली मंदिर में मानस सत्संग मंडली द्वारा भव्य सुंदरकांड पाठ।
- सांस्कृतिक संगम: दर्जनों गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक पाठ में लिया हिस्सा; सुख-समृद्धि की मांगी दुआ।
- सुरमई प्रस्तुति: कमलाकांत और गोपाल कृष्ण चौधरी के भजनों ने वातावरण को बनाया दिव्य।
भागलपुर | 19 मार्च, 2026
पूरे देश के साथ-साथ सिल्क सिटी भागलपुर भी आज ‘शक्ति’ की भक्ति में सराबोर नजर आया। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर सुबह से ही मंदिरों में शंख और घंटों की आवाज गूंजने लगी। विशेष रूप से सुल्तानगंज के रघुचक स्थित काली मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान ने स्थानीय लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुंदरकांड के पाठ से बिखरा भक्ति का रंग
मानस सत्संग मंडली, पनसल्ला के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने रामायण की महिमा और दुर्गा पूजा के उत्साह को एक सूत्र में पिरो दिया:
- भावपूर्ण गायन: कमलाकांत चौधरी और गोपाल कृष्ण चौधरी ने सुंदरकांड का ऐसा विस्तारपूर्वक पाठ किया कि भक्त झूमने पर मजबूर हो गए।
- जन-सहभागिता: केवल रघुचक ही नहीं, बल्कि आसपास के लगभग आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण पुरुष, महिलाएं और बच्चे इस आयोजन का हिस्सा बने।
- सामुदायिक एकता: कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शशि भूषण चौधरी, नंदन सिंह और उनकी टीम ने जिस तरह से प्रबंधन संभाला, वह क्षेत्र में सांस्कृतिक एकता की मिसाल पेश करता है।
VOB का नजरिया: क्या ‘आध्यात्म’ ही है ग्रामीण बिहार की असली ताकत?
चैत्र नवरात्र का यह पर्व केवल व्रत और उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों में आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का जरिया भी है। रघुचक काली मंदिर में हुआ यह सुंदरकांड पाठ बताता है कि आधुनिकता के दौर में भी भागलपुर की ग्रामीण जनता अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे का संचार भी करते हैं। शक्ति की यह आराधना निश्चित रूप से अंग क्षेत्र के लिए सुखद भविष्य का संकेत है।


