HIGHLIGHTS: परीक्षकों की ‘डिजिटल’ लापरवाही पर बोर्ड का हंटर
- बड़ी लापरवाही: मूल्यांकन केंद्रों के अंदर से छात्रों के उत्तर और परीक्षकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल।
- सीबीएसई का एक्शन: बोर्ड ने सभी केंद्रों को ‘चेतावनी पत्र’ जारी किया; प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश।
- भागलपुर अपडेट: सिटी को-ऑर्डिनेटर सुमंत कुमार ने कहा— “भागलपुर से कोई लीक नहीं, लेकिन सभी परीक्षकों को दी गई हिदायत।”
- प्राइवेसी ब्रीच: 12वीं की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं भी प्लेटफॉर्म्स पर दिखने से बोर्ड की साख पर सवाल।
📊 इवैल्यूएशन सेंटर की ‘गोपनीयता’ का नया प्रोटोकॉल
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उल्लंघन (Violation) |
बोर्ड का निर्देश (Instruction) |
असर (Impact) |
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उत्तर पुस्तिका की फोटो |
सख्त मनाही (Strict Ban) |
गोपनीयता भंग होने पर कानूनी कार्रवाई संभव। |
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मूल्यांकन केंद्र में मोबाइल |
प्रतिबंधित/सीमित उपयोग |
सेंटर के अंदर की फोटो खींचना अब ‘अनुशासनहीनता’। |
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सोशल मीडिया पोस्टिंग |
करियर पर खतरा |
उल्लंघन करने वाले शिक्षकों पर लग सकता है प्रतिबंध। |
भागलपुर | 19 मार्च, 2026
सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की जांच (Evaluation) अब शिक्षकों के लिए केवल ‘ड्यूटी’ नहीं, बल्कि ‘कंटेंट’ बन गई है। कुछ परीक्षकों के ‘डिजिटल एडिक्शन’ ने बोर्ड की वर्षों पुरानी गोपनीयता को सोशल मीडिया के चौराहे पर ला खड़ा किया है। कई केंद्रों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जहाँ शिक्षक कॉपी जांचते हुए अपनी फोटो या छात्रों के ‘अजीबोगरीब’ उत्तरों की तस्वीरें वायरल कर रहे हैं।
शिक्षक या ‘कंटेंट क्रिएटर’? बोर्ड ने जताई नाराजगी
मूल्यांकन केंद्रों की मर्यादा भंग होने की खबरों के बाद सीबीएसई ने कड़ा रुख अपनाया है:
- स्कैन कॉपियां वायरल: हैरानी की बात यह है कि 12वीं की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं भी सोशल मीडिया पर देखी जा रही हैं, जो एक गंभीर सुरक्षा चूक है।
- चेतावनी पत्र: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन केंद्र कोई ‘स्टूडियो’ नहीं है। नियमों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों और केंद्रों पर गाज गिरनी तय है।
- भागलपुर की स्थिति: सिटी को-ऑर्डिनेटर सुमंत कुमार ने राहत की बात कही है कि भागलपुर के केंद्रों से अब तक कोई भ्रामक जानकारी वायरल नहीं हुई है, लेकिन सावधानी के तौर पर सभी को सर्कुलर से अवगत करा दिया गया है।
VOB का नजरिया: जब ‘लाइक’ के चक्कर में दांव पर लग जाए छात्र का भविष्य!
शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं, लेकिन ‘रील्स’ और ‘लाइक्स’ की इस दौड़ में कुछ शिक्षक अपनी जिम्मेदारी भूल रहे हैं। एक छात्र की उत्तर पुस्तिका उसकी निजी संपत्ति और बोर्ड की गोपनीयता का हिस्सा है। उसे सार्वजनिक करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि CBSE को केवल चेतावनी पत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जो भी शिक्षक सेंटर के अंदर मोबाइल का दुरुपयोग कर रहे हैं, उन पर भारी जुर्माना या भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर बोर्ड परीक्षाओं की पवित्रता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।


