मुजफ्फरपुर में ‘पुलिस बनाम ग्रामीण’ की खूनी जंग! पप्पू यादव ने सरकार को घेरा; बोले- “प्रशासन हो गया ‘आतंकवादी’, पटना SIT से हो जांच”

HIGHLIGHTS: चोरनिया बना ‘रणक्षेत्र’, खाकी पर उठ रहे गंभीर सवाल

  • बड़ा आरोप: ग्रामीणों का दावा—पुलिस की गोली से हुई 60 वर्षीय जगतवीर राय की मौत; पुलिस का इनकार।
  • पप्पू यादव की एंट्री: पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे पूर्व सांसद; कहा—”मैं जात के लिए नहीं, न्याय के लिए आया हूं।”
  • विवाद की जड़: POCSO कोर्ट के आदेश पर आरोपी को पकड़ने गई थी गायघाट पुलिस, तभी भड़की हिंसा।
  • हाई-लेवल जांच: पप्पू यादव ने मुजफ्फरपुर पुलिस पर अविश्वास जताते हुए पटना से SIT जांच की मांग की।

घटनाक्रम का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

विवरण

जानकारी

घटनास्थल

ग्राम—असिया/चोरनिया, थाना—गायघाट, मुजफ्फरपुर

वक्त

मंगलवार देर रात

मृतक

जगतवीर राय (60 वर्ष)

पुलिस का तर्क

गिरफ्तारी के दौरान झड़प हुई, लेकिन मौत गोली लगने से नहीं हुई।

ग्रामीणों का तर्क

पुलिस की फायरिंग में गई जान; पुलिसिया बर्बरता का आरोप।

 

मुजफ्फरपुर | 19 मार्च, 2026

​मुजफ्फरपुर का गायघाट इलाका इन दिनों सुलग रहा है। मंगलवार की रात असिया गांव में जो कुछ हुआ, उसने पुलिस और पब्लिक के रिश्तों के बीच एक गहरी खाई खोद दी है। एक तरफ पुलिस अपनी ‘ड्यूटी’ (कोर्ट के आदेश का अनुपालन) की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ पूरा गांव चीख-चीख कर इसे ‘वर्दी वाली हत्या’ करार दे रहा है। इसी बीच, राजनीति के ‘खिलाड़ी’ पप्पू यादव ने मैदान में उतरकर मामले को और गरमा दिया है।

“प्रशासन निकम्मा और आतंकवादी हो गया है” — पप्पू यादव

​पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने पहुंचे पप्पू यादव अपने पुराने ‘एंग्री मैन’ अवतार में नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर जिला प्रशासन और पुलिसिया कार्यशैली पर हमला बोला:

  1. SIT की मांग: पप्पू यादव ने कहा कि मुजफ्फरपुर पुलिस खुद की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं कर सकती, इसलिए पटना से विशेष जांच टीम (SIT) भेजी जाए।
  2. जमीन माफिया का जिक्र: उन्होंने याद दिलाया कि मुजफ्फरपुर में वे हमेशा अपराधियों और भू-माफियाओं के खिलाफ लड़ते रहे हैं, और इस बार भी पीछे नहीं हटेंगे।
  3. गैर-जातिवादी रुख: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी विशेष जाति के समर्थन में नहीं, बल्कि पुलिसिया जुल्म के खिलाफ खड़े हैं।

रात के अंधेरे में क्या हुआ था?

​POCSO कोर्ट के सख्त आदेश के बाद गायघाट पुलिस एक आरोपी को दबोचने असिया गांव पहुंची थी।

  • ग्रामीणों का बयान: पुलिस ने अंधाधुंध कार्रवाई की और इसी दौरान जगतवीर राय को गोली लग गई।
  • पुलिस का पक्ष: झड़प और धक्का-मुक्की जरूर हुई, इलाका रणक्षेत्र बना, लेकिन गोली चलने की बात को पुलिस सिरे से खारिज कर रही है।

VOB का नजरिया: क्या ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ ही सुलझाएगी गुत्थी?

​गायघाट की यह घटना बिहार पुलिस के लिए एक बड़ा ‘लिटमस टेस्ट’ है। अगर जगतवीर राय की मौत गोली लगने से हुई है, तो यह ‘सेल्फ डिफेंस’ था या ‘लापरवाही’? और अगर गोली नहीं चली, तो 60 साल के बुजुर्ग की मौत कैसे हुई? ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पप्पू यादव की SIT वाली मांग ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। केवल प्रेस नोट जारी करने से बात नहीं बनेगी, पुलिस को वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) और बैलेस्टिक रिपोर्ट जनता के सामने रखनी होगी, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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