अमेरिका की इंटेलिजेंस प्रमुख तुलसी गबार्ड ने बुधवार को कहा कि रूस, चीन और उत्तर कोरिया के साथ-साथ पाकिस्तान उन देशों में शामिल हैं, जिनसे अमेरिका को परमाणु हमले का सबसे बड़ा खतरा है। यह बयान पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ की थी। शरीफ ने ट्रंप को ‘शांति का मसीहा’ और ‘दक्षिण एशिया का रक्षक’ बताया था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि इस तारीफ से अमेरिका के साथ उसके रिश्ते सुधरेंगे, लेकिन तुलसी गबार्ड के ताजा बयान ने पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
गबार्ड ने अमेरिकी सांसदों को चौंकाने वाले आंकड़े देते हुए बताया कि आने वाले समय में खतरा और बढ़ने वाला है। उनका अनुमान है कि 2035 तक अमेरिका पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों की संख्या बढ़कर 16,000 से अधिक हो जाएगी, जबकि वर्तमान में यह संख्या करीब 3,000 है।
उन्होंने रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती सैन्य साझीदारी को भी अमेरिका के लिए गंभीर चुनौती बताया।
ईरान को लेकर गबार्ड ने खुलासा किया कि जून 2025 में हुए हमलों में ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था। इसके बावजूद, उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान और उसके ‘प्रॉक्सी’ गुट मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के लिए अब भी बड़ा खतरा बने हुए हैं। यदि ईरानी सरकार सत्ता में बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में वह अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को फिर से विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर सकती है।


