मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि भारत समेत दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ सकती हैं।
गैस प्लांट पर हमले से बढ़ा तनाव
इजरायल ने ईरान के दुनिया के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान ने खाड़ी देशों के कई अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिनमें SAMREF रिफाइनरी, जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, अल होसन गैस फील्ड और रास लाफान रिफाइनरी जैसे बड़े केंद्र शामिल हैं।
कच्चे तेल के दाम में उछाल
तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो एक दिन में 5% से ज्यादा की बढ़ोतरी है। वहीं, गैस की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
साउथ पार्स का महत्व
साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से देश की लगभग 75% प्राकृतिक गैस का उत्पादन होता है। इस प्लांट पर हमले के बाद ईरान में बिजली संकट गहराने की आशंका है, क्योंकि देश की करीब 80% बिजली इसी गैस सप्लाई पर निर्भर है।
भारत पर क्या होगा असर?
इस घटनाक्रम का भारत पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों पर निर्भर है। खासकर LNG के लिए कतर प्रमुख सप्लायर है।
अगर गैस उत्पादन प्रभावित होता है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही बाधित होती है, तो भारत में गैस और LPG की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे घरेलू गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की पूरी संभावना है।
वैश्विक सप्लाई पर खतरा
दुनिया की बड़ी मात्रा में LNG सप्लाई कतर और ईरान से होती है। ऐसे में इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


