HIGHLIGHTS: ‘जल महोत्सव’ में आधी आबादी का पूरा सम्मान
- राज्य स्तरीय सम्मान: पटना के बापू टावर में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला पंप ऑपरेटरों और वार्ड सदस्यों को किया गया सम्मानित।
- IoT और तकनीक: अब महिलाएं केवल पंप नहीं चला रहीं, बल्कि ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) और ‘फील्ड टेस्टिंग किट’ (FTK) से पानी की शुद्धता भी जांच रही हैं।
- स्वास्थ्य में सुधार: सुरक्षित पेयजल से बिहार के ग्रामीण इलाकों में जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) में आई भारी कमी।
- महा-मंथन: PHED, शिक्षा, स्वास्थ्य और पंचायती राज जैसे कई विभागों ने मिलकर ‘सतत जलापूर्ति’ का बनाया रोडमैप।
पटना | 19 मार्च, 2026
बिहार के गांवों में अब केवल पानी नहीं, बल्कि ‘महिला सशक्तिकरण’ की धारा भी बह रही है। पटना स्थित बापू टावर सभागार में आयोजित ‘जल महोत्सव’ के दौरान आज उन महिलाओं की गौरवगाथा सुनाई दी, जिन्होंने ‘हर घर नल का जल’ योजना को अपनी जिम्मेदारी मानकर हर घर तक प्यास बुझाने का काम किया है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और वाटरएड इंडिया के इस साझा मंच ने साबित कर दिया कि बिहार की ग्रामीण जलापूर्ति की असली ‘पायलट’ महिलाएं ही हैं।
सम्मान और तकनीक का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में
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बिंदु |
विवरण |
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मुख्य अतिथि |
श्री नित्यानंद प्रसाद (अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव, PHED)। |
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सहयोगी संस्था |
वाटरएड इंडिया (WaterAid India)। |
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विशेष प्रशिक्षण |
IoT आधारित संचालन, FTK से गुणवत्ता जांच और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस। |
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प्रतिभागी विभाग |
जल जीवन हरियाली, लोहिया स्वच्छ बिहार, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पंचायती राज विभाग। |
“पंप ऑपरेटर नहीं, ये ‘जल योद्धा’ हैं” — PHED
अभियंता प्रमुख श्री नित्यानंद प्रसाद ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हर घर नल का जल’ महज पाइप बिछाने का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक सामुदायिक क्रांति है।
- महिला नेतृत्व: महिलाओं ने न केवल पंप चलाए, बल्कि समुदाय के साथ तालमेल बिठाकर जल प्रबंधन को नया आयाम दिया है।
- क्षमता वृद्धि: प्रशिक्षण सत्र के दौरान महिलाओं को आधुनिक IoT तकनीक और क्वालिटी टेस्टिंग के गुर सिखाए गए, ताकि वे खुद पानी की शुद्धता की जांच कर सकें।
- स्वास्थ्य का ‘गिफ्ट’: वक्ताओं ने इस बात पर खुशी जताई कि स्वच्छ पानी मिलने से गांवों में बीमारियों का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है।
VOB का नजरिया: जब ‘चापाकल’ से ‘ऐप’ तक पहुंची बिहार की महिलाएं!
एक दौर था जब गांव की महिलाओं का आधा दिन दूर-दराज से पानी ढोने में बीत जाता था। आज वही महिलाएं ‘पंप ऑपरेटर’ बनकर पूरे गांव को पानी पिला रही हैं और IoT (Internet of Things) जैसे भारी-भरकम शब्दों को जमीन पर उतार रही हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि इन महिला ‘जल योद्धाओं’ को न केवल प्रशस्ति पत्र मिलना चाहिए, बल्कि उनके मानदेय और तकनीकी सुरक्षा के लिए भी सरकार को और ठोस कदम उठाने चाहिए। PHED का यह ‘जल महोत्सव’ केवल उत्सव नहीं, बल्कि बिहार के बदलते ‘ग्रामीण स्वास्थ्य’ का सेलिब्रेशन है।


