दाउदनगर में ‘रक्षक’ बना भक्षक! 65 साल के डॉक्टर ने क्लीनिक में 15 साल की मासूम से की दरिंदगी; सलाखों के पीछे पहुंचा आरोपी

HIGHLIGHTS: सफेद कोट पर ‘हैवानियत’ का दाग

  • शर्मनाक: दाउदनगर थाना क्षेत्र के एक गांव में ग्रामीण चिकित्सक ने मर्यादा की सारी हदें पार कीं।
  • वारदात: दुकान पर सामान लेने गई 15 वर्षीया नाबालिग को बहला-फुसलाकर क्लीनिक में बुलाया और किया दुष्कर्म।
  • त्वरित कार्रवाई: पुलिस ने सूचना मिलते ही आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
  • कड़ा पहरा: अपर थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का दिया भरोसा।

ठगी का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

(नोट: यहाँ यह ‘अपराध फाइल’ के रूप में है)

  • आरोपी का विवरण: 65 वर्षीय ग्रामीण चिकित्सक (नाम गुप्त, न्यायिक हिरासत में)।
  • पीड़िता: 15 वर्षीया नाबालिग छात्रा।
  • घटनास्थल: गांव स्थित आरोपी का निजी क्लीनिक।
  • मुख्य आरोप: बहला-फुसलाकर दुष्कर्म, विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी।
  • पुलिस की स्थिति: दाउदनगर पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू।

दाउदनगर (औरंगाबाद) | 18 मार्च, 2026

​औरंगाबाद जिले के दाउदनगर में रिश्तों और भरोसे को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। जहाँ एक तरफ डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है, वहीं यहाँ एक 65 साल के बुजुर्ग चिकित्सक ने अपनी ही पोती की उम्र की बच्ची के साथ हैवानियत की। घटना तब हुई जब पीड़िता घर के पास ही एक दुकान से सामान लेने निकली थी।

क्लीनिक के भीतर ‘खूनी खेल’

​पीड़िता के पिता द्वारा थाने में दी गई लिखित शिकायत के अनुसार:

  1. साजिश: दोपहर के समय जब लड़की दुकान गई, तो आरोपी चिकित्सक ने उसे किसी काम के बहाने अपने क्लीनिक के अंदर बुलाया।
  2. दरिंदगी: क्लीनिक के एकांत का फायदा उठाकर उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद जब पीड़िता रोते हुए घर पहुंची, तब उसने परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई।
  3. गाली-गलौज: विरोध करने पर आरोपी ने न केवल पीड़िता को डराया, बल्कि उसके परिजनों के साथ भी बदतमीजी की।

VOB का नजरिया: क्या ‘ग्रामीण क्लीनिक’ सुरक्षित हैं?

​दाउदनगर की यह घटना समाज के उस चेहरे को उजागर करती है जहाँ उम्र और पेशा, दोनों ही नैतिकता को बचाने में नाकाम रहे। 65 साल की उम्र में इस तरह की घिनौनी मानसिकता यह दर्शाती है कि अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म होता जा रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि ऐसे मामलों में POCSO एक्ट के तहत स्पीडी ट्रायल चलाकर 3 महीने के भीतर सजा मिलनी चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में क्लीनिक चलाने वाले ऐसे ‘भेड़िये’ दोबारा किसी मासूम को निशाना न बना सकें।

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