‘मिशन 2030’ के लिए फिर नीतीश पर भरोसा! कल जदयू अध्यक्ष पद के लिए करेंगे नामांकन; 10 दिग्गज बनेंगे प्रस्तावक

HIGHLIGHTS: जदयू में ‘नितीश युग’ की निरंतरता

  • नामांकन: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 19 मार्च (गुरुवार) को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए आधिकारिक तौर पर पर्चा भरेंगे।
  • प्रस्तावक: राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा समेत पार्टी के 10 वरिष्ठ नेता उनके प्रस्तावक बनेंगे।
  • एकजुटता: प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा— “नीतीश जी के नेतृत्व में ही पार्टी को मिलेगी असली मजबूती।”
  • शिड्यूल: नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च है; निर्विरोध चुने जाने पर नाम वापसी के दिन ही होगा ऐलान।

पटना | 18 मार्च, 2026

​बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव जीतकर अपनी सक्रियता का केंद्र दिल्ली की ओर भी बढ़ाया है, अब एक बार फिर अपनी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) की कमान संभालने जा रहे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ने नामांकन संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और कल यानी 19 मार्च को वे विधिवत अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

चुनावी प्रक्रिया: क्या निर्विरोध चुने जाएंगे नीतीश?

​जदयू द्वारा जारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव कार्यक्रम के अनुसार:

  1. नामांकन: 19 मार्च से शुरू होकर 22 मार्च तक।
  2. स्क्रूटनी और वापसी: 23 और 24 मार्च को कागजों की जांच और नाम वापसी का समय।
  3. चुनाव (यदि आवश्यक हो): यदि एक से अधिक उम्मीदवार हुए, तो 27 मार्च को मतदान होगा।
  4. घोषणा: यदि केवल नीतीश कुमार का ही नामांकन होता है, तो 24 मार्च (नाम वापसी का दिन) को ही उन्हें विधिवत निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा।

पार्टी का स्टैंड: “नीतीश ही एकमात्र विकल्प”

​प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पार्टी की भावनाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता और नेता की यही इच्छा है कि नीतीश कुमार फिर से कमान संभालें।

​”नीतीश कुमार का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहना पार्टी की एकता और आने वाली चुनौतियों (विधानसभा चुनाव और संगठनात्मक विस्तार) के लिए अनिवार्य है। उनके नेतृत्व में पार्टी की स्वीकार्यता और बढ़ेगी।”

 

संजय झा की बढ़ती भूमिका

​पार्टी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वे नीतीश कुमार के प्रस्तावक के रूप में नेतृत्व करेंगे, जो यह दर्शाता है कि नीतीश के बाद पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में संजय झा का कद और अधिक मजबूत हुआ है।

VOB का नजरिया: दिल्ली में कद और पटना में पकड़!

​नीतीश कुमार का फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना यह संदेश है कि वे ‘सक्रिय राजनीति’ से पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। राज्यसभा जाना और साथ ही पार्टी की कमान अपने हाथ में रखना, उनकी ‘डुअल पावर’ स्ट्रेटजी का हिस्सा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि केसी त्यागी जैसे पुराने समाजवादियों के जाने और नई कैबिनेट के गठन की सुगबुगाहट के बीच नीतीश कुमार का अध्यक्ष बने रहना पार्टी में किसी भी संभावित बिखराव को रोकने का सबसे बड़ा ‘सुरक्षा कवच’ है। क्या यह उनके ‘रिटायरमेंट’ की अटकलों पर पूर्ण विराम है?

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