जदयू में ‘समाजवादी’ युग का अंत! केसी त्यागी ने 23 साल बाद छोड़ा नीतीश का साथ; बोले— “अब न जॉर्ज हैं, न शरद, और न वह समय”

HIGHLIGHTS: दिल्ली से पटना तक बड़ी राजनीतिक हलचल

  • इस्तीफा नहीं, ‘किनारा’: केसी त्यागी ने सदस्यता का नवीनीकरण (Renewal) न कराकर आधिकारिक तौर पर छोड़ी पार्टी।
  • अटूट रिश्ता: नीतीश कुमार के लिए व्यक्तिगत सम्मान को बताया ‘अपरिवर्तित’; 50 साल की दोस्ती पर कोई आंच नहीं।
  • बड़ा कद: 2003 में गठन से लेकर अब तक मुख्य प्रवक्ता, महासचिव और राजनीतिक सलाहकार जैसे अहम पदों पर रहे।
  • अगला कदम: 22 मार्च को दिल्ली के मावलंकर हॉल में ‘हमख्याल’ नेताओं के साथ करेंगे बड़ी बैठक।

पटना/दिल्ली | 18 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति में ‘समाजवाद’ का एक मजबूत स्तंभ माने जाने वाले केसी त्यागी ने आखिरकार जनता दल (यूनाइटेड) से अपना दशकों पुराना नाता तोड़ लिया है। मंगलवार को उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता रिन्यू न करने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है।

“जॉर्ज और शरद के बिना अधूरा है कारवां”

​त्यागी ने अपने विदाई संदेश में भावुक होते हुए उन दिनों को याद किया जब जॉर्ज फर्नांडीस पार्टी के अध्यक्ष थे और उन्होंने महासचिव के रूप में काम शुरू किया था।

​”अब न जॉर्ज फर्नांडीस हैं और न शरद यादव। वह समय भी अब बीत चुका है। मौजूदा परिस्थितियों में मैं खुद को स्थानीय राजनीति के योग्य नहीं मानता।”

📊 केसी त्यागी का जदयू में ‘सफरनामा’

कालखंड

भूमिका / पद

प्रमुख योगदान

2003

संस्थापक सदस्य

समता पार्टी और जनता दल के विलय में अहम भूमिका।

विभिन्न कार्यकाल

मुख्य महासचिव व प्रवक्ता

दिल्ली के मंचों पर पार्टी और नीतीश कुमार का प्रखर बचाव।

2024-25

राजनीतिक सलाहकार

नीतिगत मामलों पर सीएम को महत्वपूर्ण मशवरा।

क्यों आई अलगाव की नौबत?

​पिछले कुछ समय से केसी त्यागी और पार्टी नेतृत्व के बीच ‘लाइन’ को लेकर खींचतान की खबरें थीं। इजरायल-फिलिस्तीन विवाद, वक्फ बोर्ड संशोधन बिल और लेटरल एंट्री जैसे मुद्दों पर त्यागी के निजी बयान पार्टी स्टैंड से अलग दिखे थे, जिसके बाद उन्हें प्रवक्ता पद से भी हटाया गया था।

VOB का नजरिया: क्या यूपी में ‘तीसरा मोर्चा’ खड़ा करेंगे त्यागी?

​केसी त्यागी का जदयू छोड़ना केवल एक नेता का जाना नहीं, बल्कि उस पुरानी समाजवादी चौकड़ी (नीतीश-जॉर्ज-शरद-त्यागी) के आखिरी लिंक का टूटना है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि त्यागी अब अपनी जड़ें उत्तर प्रदेश में तलाश रहे हैं। 22 मार्च की बैठक यह तय करेगी कि क्या वे किसी नई पार्टी (जैसे रालोद या सपा) के करीब जाएंगे या फिर गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस ‘तीसरे ध्रुव’ की नींव रखेंगे। नीतीश कुमार का दिल्ली की राजनीति की ओर बढ़ना और त्यागी का पार्टी छोड़ना, बिहार एनडीए के भीतर एक बड़े ‘री-स्ट्रक्चरिंग’ का संकेत है।

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