HIGHLIGHTS: आधी रात का वो ‘खौफनाक’ मंजर
- सर्जिकल स्ट्राइक: मोतिहारी पुलिस और एसटीएफ (STF) की संयुक्त टीम ने रात के सन्नाटे में सिहोरवा गांव को चारों तरफ से घेरा।
- अंधाधुंध फायरिंग: पुलिस की आहट मिलते ही अपराधियों ने बरसाईं गोलियां; एक घंटे तक युद्ध जैसा रहा नजारा।
- बड़ा बलिदान: अचानक हुए हमले में जांबाज एसटीएफ जवान श्रीराम यादव को लगी गोली, कर्तव्य निभाते हुए हुए शहीद।
- मौत का सामान: मौके से एक प्रतिबंधित कार्बाइन, 2 पिस्टल, 2 देसी कट्टे और 17 खोखे बरामद।
मोतिहारी | 18 मार्च, 2026
मोतिहारी का सिहोरवा गांव कल रात गोलियों की गूंज से दहल उठा। जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब पुलिस और अपराधियों के बीच ‘आर-पार’ की जंग चल रही थी। रात करीब 1:30 बजे पुलिस ने जैसे ही अपराधियों के ठिकाने पर दबिश दी, अपराधियों ने सरेंडर करने के बजाय गोलियों की बौछार कर दी। घरों में दुबके लोग सहमे रहे और एक घंटे तक मौत का तांडव चलता रहा।
कुख्यात कुंदन ठाकुर: जुर्म की पूरी ‘कुंडली’
एनकाउंटर में ढेर हुआ कुंदन ठाकुर पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। उसकी दहशत का अंदाजा इन कांडों से लगाया जा सकता है:
- हत्या (2020): चकिया के बखरी गांव में अमरेंद्र कुमार पांडेय की गोली मारकर बेरहमी से हत्या।
- रंगदारी और फायरिंग (2024): पूरण छपरा के राजन वस्त्रालय पर रंगदारी के लिए गोलियां बरसाईं।
- जानलेवा हमला (2025): मुजफ्फरपुर के राजेपुर में दवा दुकानदार विजय शर्मा पर अंधाधुंध फायरिंग कर जान लेने की कोशिश।
- दर्ज मामले: हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट के तहत मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में कुल 6 संगीन मामले दर्ज।
प्रियांशु दुबे: कुंदन का साथी प्रियांशु भी कोई दूध का धुला नहीं था, उस पर मोतिहारी में लूट का मामला पहले से दर्ज था।
अपराधियों का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में
- कुल बरामदगी: 1 कार्बाइन, 2 पिस्टल, 2 देसी कट्टे, 5 जिंदा कारतूस और 17 खोखे।
- एनकाउंटर की अवधि: लगभग 1 घंटा लगातार फायरिंग।
- पुलिस की कार्रवाई: चकिया, नगर थाना और राजेपुर पुलिस की रडार पर थे ये अपराधी।
- गिरफ्तारी: मुठभेड़ के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी।
VOB का नजरिया: शहादत और दहशत का अंत
एसटीएफ जवान श्रीराम यादव की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वर्दी की कीमत कितनी बड़ी होती है। कुंदन ठाकुर जैसे अपराधी जिनके पास कार्बाइन जैसे घातक हथियार हों, वे समाज के लिए कैंसर की तरह हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि एनकाउंटर में अपराधियों का खात्मा पुलिस की मजबूरी हो सकती है, लेकिन कार्बाइन का मिलना यह बताता है कि अपराधियों के पास हथियारों की सप्लाई लाइन अब भी मजबूत है। पुलिस को अब उस ‘सोर्स’ पर प्रहार करना होगा जहाँ से ये हथियार आ रहे हैं।


