भोजपुर पुलिस की ‘सुपर स्ट्राइक’! आरा में अंतरजिला बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़; 11 मोटरसाइकिलों के साथ 5 शातिर गिरफ्तार

HIGHLIGHTS: चोरों पर आरा पुलिस का ‘प्रहार’

  • बड़ी रिकवरी: भोजपुर एसपी के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में चोरी की 11 मोटरसाइकिलें बरामद।
  • गैंग का खात्मा: आरा नगर थाना पुलिस ने गिरोह के 5 सक्रिय सदस्यों को दबोचा।
  • नेटवर्क: गिरफ्तार अभियुक्तों का जाल आरा नगर से लेकर बड़हरा, बबुरा और कोईलवर तक फैला हुआ था।

आरा/भोजपुर | 17 मार्च, 2026

​भोजपुर पुलिस ने बाइक चोरों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। शहर में बढ़ती बाइक चोरी की घटनाओं को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) के सख्त निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में पुलिस ने एक शातिर गिरोह की कमर तोड़ दी है। 11 मोटरसाइकिलों की बरामदगी यह बताती है कि यह गिरोह कितने बड़े पैमाने पर सक्रिय था।

सलाखों के पीछे पहुंचे गिरोह के ‘खिलाड़ी’

​पुलिस ने सटीक सूचना और घेराबंदी के जरिए जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले इन 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है:

नाम

पिता का नाम

पता (थाना/जिला)

राहुल कुमार तिवारी

राम अयोध्या तिवारी

अमीर टोला धरहरा, आरा नगर

हरिओम सिंह

स्व० बालेश्वर सिंह

बिंदगांवा, बड़हरा

राजनिक्की उर्फ निक्की सिंह

स्व० शशिभूषण सिंह

फुहा, बबुरा

विशाल कुमार

स्व० सोनालाल

बड़का चंदा, कोईलवर

शैलेश कुमार

स्व० लालबाबू राय

चांदी, भोजपुर

कैसे काम करता था यह गिरोह?

​प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों से मास्टर चाबी के सहारे मिनटों में बाइक उड़ा लेता था।

  • तरीका: चोरी के बाद इन खिलाड़ियों का काम था बाइकों के नंबर प्लेट बदलना और फिर उन्हें सस्ते दामों पर ग्रामीण इलाकों या दूसरे जिलों में खपा देना।
  • रिकवरी: बरामद 11 मोटरसाइकिलें इस बात का सबूत हैं कि इनका ‘स्टॉक’ हमेशा तैयार रहता था। पुलिस अब इन बाइकों के असली मालिकों की पहचान करने में जुटी है।

VOB का नजरिया: आम आदमी की मेहनत की कमाई पर ‘डाका’ बंद हो!

​मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बाइक केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उसकी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा होती है। भोजपुर पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है क्योंकि 11 बाइकों का मिलना 11 परिवारों के लिए एक राहत की खबर है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या इन 5 की गिरफ्तारी से ‘सिंडिकेट’ खत्म होगा? पुलिस को अब उन ‘खरीददारों’ तक भी पहुंचना चाहिए जो चोरी की बाइक जानते हुए भी खरीदते हैं, क्योंकि जब तक मांग रहेगी, तब तक ‘निक्की’ और ‘विशाल’ जैसे चोर पैदा होते रहेंगे।

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