HIGHLIGHTS
- वो 4 नाम: कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायक के गायब होने से एनडीए की पांचवीं सीट पक्की हुई।
- रणक्षेत्र बना विधानसभा: संसदीय कार्यमंत्री विजय चौधरी का कमरा सुबह 7 बजे से ही ‘कंट्रोल रूम’ में तब्दील हो गया था।
- मोबाइल स्विच ऑफ: तेजस्वी यादव के कमरे में बेचैनी थी, क्योंकि गायब विधायकों के फोन नहीं लग रहे थे।
- एनडीए की एकजुटता: एनडीए के सभी 202 विधायकों ने मतदान किया, जिससे सत्ता पक्ष में खुशी की लहर दौड़ गई।
पटना | 17 मार्च, 2026
बिहार राज्यसभा चुनाव का परिणाम केवल संख्या बल का खेल नहीं था, बल्कि पर्दे के पीछे चली जबरदस्त ‘नूरा-कुश्ती’ और रणनीति का नतीजा था। विधानसभा के गलियारों में सुबह से ही हलचल तेज थी। जहाँ सत्ता पक्ष एक-एक वोट सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी कर रहा था, वहीं विपक्षी खेमे में अपनों के ही ‘लापता’ होने की खबर से सन्नाटा पसर गया था।
इन 4 विधायकों ने मोड़ दिया चुनाव का रुख
विपक्ष की हार की सबसे बड़ी वजह वे चार विधायक रहे, जिन्होंने ऐन वक्त पर पाला तो नहीं बदला, लेकिन मतदान से दूरी बनाकर एनडीए का रास्ता साफ कर दिया:
- सुरेंद्र प्रसाद: विधायक, वाल्मीकिनगर (कांग्रेस)।
- मनोहर प्रसाद: विधायक, मनिहारी (कांग्रेस)।
- मनोज विश्वास: विधायक, फारबिसगंज (कांग्रेस)।
- फैसल रहमान: विधायक, ढाका (राजद)।
कंट्रोल रूम में ‘कॉल’ का शोर: “गोपालजी को फोन लगाओ…”
विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री विजय चौधरी का कमरा किसी युद्ध के मैदान जैसा दिख रहा था।
- NDA की मुस्तैदी: ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सुबह 8 बजे ही पहुंच गए थे। विनय बिहारी ने पहला वोट डाला, जिसके बाद श्याम रजक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने भी मतदान किया।
- नित्यानंद राय की एंट्री: सुबह 9:30 बजे केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के पहुंचते ही विधायकों का उत्साह बढ़ गया।
- विपक्ष का हाल: तेजस्वी यादव के कमरे में मोबाइल की घंटियां तो बज रही थीं, लेकिन गायब विधायकों के फोन ‘आउट ऑफ रीच’ थे। अख्तरूल ईमान (AIMIM) के पहुंचने पर कुछ देर के लिए हलचल बढ़ी, लेकिन लापता विधायकों की खबर ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं।
मांझी की पतोहू और ‘गलत दरवाजा’
दिनभर के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच एक ऐसा पल भी आया जब एनडीए खेमे की सांसें अटक गईं। खबर उड़ी कि जीतन राम मांझी की समधन और पतोहू तेजस्वी यादव के कमरे में हैं। हालांकि, जल्द ही साफ हुआ कि वे गलती से उस कमरे में चली गई थीं और घुसते ही बाहर निकल आईं, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने राहत की सांस ली।
VOB का नजरिया: क्या यह ‘भितरघात’ था या सोची-समझी रणनीति?
विपक्ष के 4 विधायकों का एक साथ फोन बंद होना और मतदान से नदारद रहना केवल इत्तेफाक नहीं हो सकता। यह राजद और कांग्रेस के भीतर बढ़ रहे ‘असंतोष’ का सीधा सबूत है। विजय चौधरी और श्रवण कुमार की ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ के आगे तेजस्वी यादव की रणनीति फेल साबित हुई। जब एनडीए अपने सभी 202 विधायकों को मतदान केंद्र तक ले आया, तब विपक्ष अपने 41 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए अपनों को ही फोन लगाता रह गया।


