HIGHLIGHTS
- कड़ा एक्शन: अनुशासनहीनता और महिला से गलत आचरण के मामले में पुलिस अवर निरीक्षक (SI) अमरनाथ कुमार सेवा से बर्खास्त।
- आदेश: शाहाबाद के डीआईजी डॉ. सत्य प्रकाश ने सोमवार को जारी किया बर्खास्तगी का आदेश।
- पुराना पाप: मामला साल 2022 का है, जब आरोपी दारोगा रोहतास के दिनारा थाने में तैनात था।
- जांच की आंच: रोहतास एसपी की अनुशंसा और विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई।
सासाराम/कैमूर | 17 मार्च, 2026
बिहार पुलिस में ‘दागी’ अफसरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रंग ला रही है। शाहाबाद रेंज के डीआईजी डॉ. सत्य प्रकाश ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कैमूर जिला पुलिस बल में तैनात दारोगा अमरनाथ कुमार को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि उन रक्षकों के लिए एक कड़ा संदेश है जो भक्षक बनने की कोशिश करते हैं।
क्या था पूरा मामला? (शादी का झांसा और शोषण)
यह मामला आज का नहीं, बल्कि साल 2022 की एक काली करतूत का नतीजा है:
- पदस्थापना: उस समय अमरनाथ कुमार रोहतास जिले के दिनारा थाना में तैनात थे।
- आरोप: एक पीड़ित महिला ने उन पर आरोप लगाया था कि दारोगा ने उसे बहला-फुसलाकर शादी का झांसा दिया और लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया।
- प्राथमिकी: महिला की शिकायत पर उस दौरान गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
जांच और बर्खास्तगी की प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए रोहतास एसपी ने इसकी विस्तृत जांच कराई थी। विभागीय जांच में दारोगा पर लगे आरोप सही पाए गए, जिसके बाद:
- रोहतास एसपी ने अनुशासनहीनता और गलत आचरण को देखते हुए बर्खास्तगी की अनुशंसा की।
- डीआईजी डॉ. सत्य प्रकाश ने सोमवार को विभागीय जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया और दारोगा को सेवा से बाहर करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।
- वर्तमान में अमरनाथ कुमार कैमूर पुलिस बल का हिस्सा थे, जहाँ से अब उनकी विदाई हो गई है।
VOB का नजरिया: कानून के रखवाले ही तोड़ेंगे कानून, तो क्या होगा?
दारोगा अमरनाथ कुमार की बर्खास्तगी बिहार पुलिस की छवि सुधारने की दिशा में एक जरूरी कदम है। जब कानून का रखवाला ही किसी महिला की लाचारी का फायदा उठाकर उसका शोषण करने लगे, तो आम जनता का भरोसा पुलिस से उठने लगता है। डीआईजी डॉ. सत्य प्रकाश की यह त्वरित कार्रवाई यह बताती है कि वर्दी की आड़ में छिपे ‘अपराधियों’ के लिए महकमे में कोई जगह नहीं है। 2022 के मामले में 2026 में आया यह फैसला भले ही देर से आया हो, लेकिन इसने पीड़ित महिला को इंसाफ की उम्मीद जरूर दी है।


