HIGHLIGHTS
- जुबानी जंग: राज्यसभा चुनाव में NDA की क्लीन स्वीप के बाद बिहार की सियासत में ‘आरोप-प्रत्यारोप’ का दौर तेज।
- मांझी का हमला: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने टिकट वितरण में ‘पैसे के खेल’ का लगाया आरोप।
- डिप्टी CM का तंज: विजय सिन्हा बोले— “राजद अपने विधायकों को होटलों में बंधुआ मजदूर की तरह रखती है।”
- विपक्ष में ‘बगावत’: महागठबंधन के 4 विधायकों के नदारद रहने पर NDA ने घेरा; केवल 37 विधायकों ने किया था मतदान।
पटना | 17 मार्च, 2026
बिहार राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल NDA को 5-0 की बढ़त दी है, बल्कि महागठबंधन के भीतर की दरारों को भी सड़क पर ला दिया है। चुनाव के दौरान विपक्ष के 4 विधायकों की ‘अनुपस्थिति’ और केवल 37 वोटों की ‘पर्ची’ ने सत्ता पक्ष को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने राजद की राजनीतिक कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
“पैसे का खेल और बंद फोन”: जीतन राम मांझी का ‘X’ पर धमाका
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए विपक्ष की दुखती रग पर हाथ रखा है।
- सीधा आरोप: मांझी ने कहा कि जब टिकट देने के लिए पैसों का लेनदेन होगा, तो विधायकों की निष्ठा डगमगाना तय है।
- बयान: “अगर पैसे लेकर टिकट बेचोगे तो विधायक भागेंगे ही। ऐसे में विधायकों का फोन बंद होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।”
“होटल और बंधुआ मजदूर”: विजय सिन्हा का करारा हमला
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजद और कांग्रेस की ‘होटल पॉलिटिक्स’ पर हमला बोलते हुए इसे ‘पुरानी संस्कृति’ बताया।
- बंधक राजनीति: सिन्हा ने आरोप लगाया कि राजद अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं करती और उन्हें होटलों में कैद कर ‘बंधुआ मजदूर’ की तरह रखती है।
- डर का माहौल: उन्होंने कहा कि विधायकों को नियंत्रित करने के लिए डर का माहौल बनाया जाता है, लेकिन लोकतंत्र में ऐसी विचारधारा ज्यादा दिन नहीं टिकती।
सियासी गणित: कहाँ हुई महागठबंधन से चूक?
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने विपक्ष की एकजुटता के दावों की हवा निकाल दी है:
- अनुपस्थित विधायक: कांग्रेस के मनोज विश्वास, सुरेंद्र कुशवाहा, मनोहर प्रसाद सिंह और राजद के फैसल रहमान वोटिंग से दूर रहे。
- NDA की ताकत: सभी पांचों उम्मीदवार (नीतीश कुमार, नितिन नवीन, राम नाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार) भारी मतों से जीते。
- वोटों का बिखराव: महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद महज 37 विधायकों का वोटिंग करना ‘क्रॉस वोटिंग’ और ‘असंतोष’ की पुष्टि करता है।
VOB का नजरिया: क्या ‘पैसे’ या ‘अविश्वास’ ने डुबोई विपक्ष की नैया?
जीतन राम मांझी का ‘पैसे लेकर टिकट’ वाला बयान उस पुराने घाव को कुरेदता है जिसे लेकर बिहार की राजनीति में अक्सर चर्चा होती रही है। वहीं, विजय सिन्हा का ‘बंधुआ मजदूर’ वाला तंज सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाता है। सवाल यह है कि अगर विधायक अपनी ही पार्टी से खुश होते, तो उन्हें ‘होटल’ भेजने की जरूरत क्यों पड़ती? और अगर वे निष्ठावान थे, तो 4 अहम चेहरे ऐन वक्त पर गायब क्यों हुए? राज्यसभा चुनाव के ये नतीजे बताते हैं कि महागठबंधन को ‘बाहरी विरोध’ से ज्यादा ‘अंदरूनी बगावत’ से बचने की जरूरत है।


