HIGHLIGHTS
- बड़ा आयोजन: 19 मार्च 2026 को सियालदह के डॉ. बी.सी. रॉय प्रेक्षागृह में सजेगी सम्मान की महफिल.
- अवॉर्ड लिस्ट: 80 गैर-राजपत्रित कर्मचारी और 20 राजपत्रित अधिकारियों सहित कुल 100 व्यक्तिगत पुरस्कार दिए जाएंगे.
- खास शील्ड: विभिन्न विभागों और मंडलों के बीच 38 प्रदर्शन शील्ड का होगा वितरण; ‘महाप्रबंधक की समग्र उत्कृष्टता शील्ड’ पर रहेगी सबकी नजर.
- कड़ी चयन प्रक्रिया: स्व-नामांकन से लेकर SAG समिति की जांच तक, भ्रष्टाचार मुक्त ट्रैक रिकॉर्ड वाले कर्मियों का ही हुआ चयन.
कोलकाता | 17 मार्च, 2026
भारतीय रेलवे की धड़कन कहे जाने वाले कर्मठ रेलकर्मियों के लिए गौरव का पल आ गया है। पूर्व रेलवे (Eastern Railway) अपने सबसे प्रतिष्ठित ‘विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025’ के जरिए उन हाथों को सम्मानित करने जा रहा है, जो दिन-रात पटरियों पर सुरक्षा और सेवा की इबारत लिखते हैं. यह जोन स्तर का सर्वोच्च सम्मान है, जो रेल मंत्री-स्तरीय पुरस्कारों के ठीक बाद आता है.
100 जांबाजों को सम्मान: जमीन से आसमान तक की मेहनत
इस वर्ष का पुरस्कार समारोह समावेशी रखा गया है, जिसमें सेवा के हर स्तर को प्रतिनिधित्व मिला है:
- व्यक्तिगत सम्मान: कुल 100 रेलकर्मियों को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए चुना गया है. इनमें 80 फील्ड में काम करने वाले गैर-राजपत्रित कर्मचारी और 20 वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं.
- चैंपियन ऑफ चैंपियंस: व्यक्तिगत पुरस्कारों के अलावा, रेलवे के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विभागों और कारखानों को 38 प्रदर्शन शील्ड दी जाएंगी. सबसे प्रतिष्ठित ‘महाप्रबंधक की समग्र दक्षता शील्ड’ उस मंडल को मिलेगी जिसने संचालन में सर्वश्रेष्ठ मानक स्थापित किए हैं.
कैसे हुआ विजेताओं का चयन? (पारदर्शिता का मॉडल)
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने बताया कि इस पुरस्कार की राह आसान नहीं थी:
- स्व-नामांकन: प्रक्रिया की शुरुआत कर्मचारियों के खुद के नामांकन से हुई.
- गहन जांच: वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) की तीन सदस्यीय समिति ने हर आवेदन की बारीकी से पड़ताल की.
- क्लीन चिट: चयन के लिए अनिवार्य शर्त यह थी कि कर्मचारी के विरुद्ध कोई भी सतर्कता (Vigilance) या विभागीय कार्रवाई लंबित न हो.
- नो रिपीट पॉलिसी: सबको मौका देने के लिए नियम है कि एक बार पुरस्कार मिलने के बाद अगले तीन वर्षों तक उसी व्यक्ति का दोबारा चयन नहीं हो सकता.
महाप्रबंधक की मौजूदगी और सांस्कृतिक छटा
समारोह पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा. वे न केवल पुरस्कार बाटेंगे, बल्कि विजेताओं की उपलब्धियों पर आधारित एक रंगीन स्मारिका पुस्तिका का विमोचन भी करेंगे. शाम को यादगार बनाने के लिए रेलवे की सांस्कृतिक टीम द्वारा विशेष कार्यक्रम भी पेश किए जाएंगे.
VOB का नजरिया: पटरियों के पीछे के ‘मौन नायकों’ को सलाम!
रेलवे केवल इंजन और डिब्बों का नाम नहीं है, बल्कि यह उन हजारों रेलकर्मियों के पसीने से चलती है जो धूप, बारिश और ठंड की परवाह किए बिना काम करते हैं। ‘विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ जैसे आयोजन न केवल मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी जन्म देते हैं। स्व-नामांकन की प्रक्रिया यह दर्शाती है कि रेलवे अब अपने कर्मचारियों के आत्मविश्वास को मंच दे रही है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ सभी 100 विजेताओं को अग्रिम बधाई देता है।


