बिहार में सरकारी भवनों के ‘घटिया निर्माण’ पर लगाम! 10 हाई-प्रोफाइल उड़नदस्ता टीमों का गठन; ईंट से लेकर वायरिंग तक की होगी लैब जांच

HIGHLIGHTS

  • जीरो टॉलरेंस: भवन निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के लिए गठित कीं 10 विशेष फ्लाइंग स्क्वाड टीमें।
  • पारदर्शिता का ‘मास्टरस्ट्रोक’: अधीक्षण अभियंता (SE) अपने जोन को छोड़ दूसरे जोन की करेंगे जांच; नहीं चलेगी ‘मिलीभगत’।
  • विद्युत सुरक्षा: वायरिंग और बिजली उपकरणों की जांच के लिए भी अलग से एक्सपर्ट टीम तैनात।
  • हाई-टेक लैब: कंक्रीट और ईंटों की जांच के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला में 55 आधुनिक यंत्रों का होगा इस्तेमाल।

पटना | 16 मार्च, 2026

​बिहार में अब सरकारी भवनों के निर्माण में ‘बालू-गिट्टी’ का खेल और घटिया सामग्री का इस्तेमाल ठेकेदारों को भारी पड़ने वाला है। भवन निर्माण विभाग ने भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए 10 उड़नदस्ता दलों (Flying Squads) का गठन कर दिया है। ये दल राज्यभर में चल रहे नवनिर्माण और जीर्णोद्धार (Renovation) कार्यों का किसी भी वक्त ‘सरप्राइज टेस्ट’ कर सकेंगे।

कौन होगा इन टीमों में शामिल?

​प्रत्येक उड़नदस्ता दल को काफी शक्तिशाली बनाया गया है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों की एक त्रिमूर्ति होगी:

  1. अधीक्षण अभियंता (SE) – टीम का नेतृत्व करेंगे।
  2. कार्यपालक अभियंता (EE) – तकनीकी पहलुओं की जांच करेंगे।
  3. सहायक अभियंता (AE) – ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे।

सेटिंग रोकने के लिए ‘क्रॉस-चेकिंग’ फार्मूला

​विभागीय सचिव श्री कुमार रवि ने एक बड़ा पारदर्शी बदलाव किया है। अब कोई भी अधीक्षण अभियंता अपने खुद के पदस्थापन अंचल (Posting Zone) की योजनाओं की जांच नहीं करेगा। उन्हें दूसरे प्रमंडलों में भेजा जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर इंजीनियरों और ठेकेदारों के बीच होने वाली किसी भी ‘सेटिंग’ को खत्म किया जा सके। ये सभी दल मुख्य अभियंता (गुणवत्ता अनुश्रवण) के सीधे नियंत्रण में काम करेंगे।

55 यंत्रों वाली लैब में होगी ‘सामग्री की अग्निपरीक्षा’

​उड़नदस्ता दल केवल मौके पर जाकर फाइलें नहीं देखेंगे, बल्कि:

  • सैंपल कलेक्शन: कार्यस्थल से ईंट, बालू, गिट्टी और कंक्रीट (क्यूब मोल्ड) के सैंपल उठाए जाएंगे।
  • केंद्रीय प्रयोगशाला: इन सैंपलों को अंचल स्तरीय या केंद्रीय लैब भेजा जाएगा, जहाँ 55 से अधिक आधुनिक मशीनों से उनकी मजबूती और टिकाऊपन की जांच होगी।
  • विद्युत ऑडिट: भवनों में होने वाली वायरिंग और इलेक्ट्रिकल फिटिंग की जांच के लिए विशेष रूप से टीम नियुक्त की गई है, ताकि भविष्य में शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
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