पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पांचवीं सीट को लेकर एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला बन गया है। एनडीए जहां सभी पांच सीटों पर जीत का दावा कर रहा है, वहीं महागठबंधन भी पांचवीं सीट पर अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।
बताया जा रहा है कि महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव की नजर ओवैसी की पार्टी के पांच विधायकों के समर्थन पर टिकी हुई है। हालांकि उनके इस मिशन में सहयोगी दलों के कुछ विधायक ही बाधा बनते नजर आ रहे हैं।
राज्यसभा की इन पांच सीटों के लिए सोमवार को मतदान होना है। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत है। आंकड़ों के हिसाब से पूरे विपक्ष के पास मिलाकर करीब 41 वोट हैं, जिससे एक सीट जीतने की संभावना बनती है। दूसरी ओर, एनडीए को पांचवीं सीट जीतने के लिए तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है और गठबंधन के नेता इस संख्या के पूरा होने का दावा कर रहे हैं।
इस बीच कांग्रेस के छह विधायकों पर सभी की नजर टिकी हुई है। पार्टी के भीतर स्थिति कुछ असहज बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के छह में से कम से कम तीन विधायक फिलहाल संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसी चर्चा है कि इनमें से कुछ विधायक एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दो विधायक फोन तक नहीं उठा रहे हैं, जबकि एक अन्य विधायक अब तक पटना नहीं पहुंचे हैं और लगातार आने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पार्टी नेतृत्व का अपने विधायकों पर पूरा नियंत्रण नहीं रह गया है।
इधर, बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु इस समय राज्य से बाहर बताए जा रहे हैं और अभी तक पटना नहीं पहुंचे हैं। वहीं प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम सोमवार को पटना पहुंचे हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वर्तमान हालात में बिहार कांग्रेस नेतृत्व दबाव में नजर आ रहा है।
अब सबकी नजर सोमवार को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हुई है, जिससे यह साफ होगा कि पांचवीं सीट किसके खाते में जाती है।


