HIGHLIGHTS
- शानदार समापन: 12 मार्च से चल रहे पूर्वी भारत के सबसे बड़े कृषि यांत्रिकीकरण मेले का सफल समापन।
- बंपर बिक्री: 4 दिनों में 4.78 करोड़ रुपये के कृषि यंत्र बिके; सरकार ने दिया ₹1.85 करोड़ का अनुदान।
- भारी जनसैलाब: बिहार के कोने-कोने से पहुंचे 35,000 से अधिक किसान और आमजन।
- सम्मान: उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बिरला टायर्स को प्रथम, हेवेल्स को द्वितीय और शक्तिमान को मिला तृतीय पुरस्कार।
पटना | 15 मार्च, 2026
राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान पिछले चार दिनों से आधुनिक खेती की गूँज का गवाह बना। रविवार को ‘एग्रो बिहार 2026’ का भव्य समापन हुआ। इस मेले ने यह साबित कर दिया कि बिहार का किसान अब पारंपरिक हल-बैल से आगे बढ़कर ड्रोन, हार्वेस्टर और आधुनिक तकनीकों के सहारे ‘स्मार्ट फार्मिंग’ की ओर कदम बढ़ा चुका है।
“तकनीक ही बनेगी किसानों की ताकत”: कृषि मंत्री राम कृपाल यादव
समापन समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि यह मेला केवल मशीन दिखाने का जरिया नहीं, बल्कि खेती को लाभकारी बनाने का एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा, “मशीनीकरण से न केवल मजदूरी का बोझ घटेगा, बल्कि कम समय में अधिक पैदावार संभव होगी।” मंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रहे कृषि रोड मैप की सफलता का भी जिक्र किया।
सब्सिडी का ‘सुपर संडे’: 395 यंत्रों की हुई खरीदारी
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मेले ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:
- कुल अनुदान: 395 कृषि यंत्रों की खरीद पर 1.85 करोड़ रुपये की भारी सब्सिडी सीधे किसानों को दी गई।
- मार्केट वैल्यू: इन मशीनों की बाजार में कुल कीमत लगभग 4.78 करोड़ रुपये है।
- अंतिम दिन का जोश: अकेले रविवार को ही 1840 किसानों ने मेले का भ्रमण कर आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली।
पूर्वी भारत का ‘महाकुंभ’: विभाग की बड़ी उपलब्धि
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने बताया कि वर्ष 2011 से शुरू हुआ यह सफर आज पूर्वी भारत का सबसे बड़ा यांत्रिकीकरण मेला बन चुका है। मेले में केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, गन्ना उद्योग और गव्य विकास जैसे स्टॉलों ने भी किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग के गुण सिखाए। कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने भी विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय की सराहना की।
VOB का नजरिया: मशीनों से सजे खेत, बदलता बिहार!
’एग्रो बिहार 2026′ का सफल आयोजन बिहार के ग्रामीण अर्थतंत्र के लिए एक शुभ संकेत है। ₹1.85 करोड़ की सब्सिडी का सीधा लाभ मिलना यह दर्शाता है कि सरकार कृषि यांत्रिकीकरण को लेकर गंभीर है। हालांकि, असली चुनौती इन मशीनों के रखरखाव और छोटे किसानों तक इनकी पहुंच सुनिश्चित करने की है। बिरला टायर्स और शक्तिमान जैसी बड़ी कंपनियों का बिहार के बाजार में रुचि दिखाना यह बताता है कि यहाँ का एग्रो-मार्केट अब परिपक्व हो रहा है। अगर यह तकनीक हर पंचायत तक पहुँचती है, तो बिहार को ‘भारत का फूड बास्केट’ बनने से कोई नहीं रोक सकता।


