गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में आयोजित राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। मोहम्मदाबाद क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पति पर अपहरण, जबरन निकाह, धर्म परिवर्तन और बच्चों पर मजहबी दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पुलिस पर भी मामले में लापरवाही और गलत मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया है।
महिला की शिकायत सुनने के बाद महिला आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अपहरण के बाद जबरन निकाह का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि उसकी परेशानियों की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। महिला के अनुसार, उसी गांव के रहने वाले अफसर हुसैन ने उसका अपहरण कर लिया और उसे महाराष्ट्र के एक गांव में करीब तीन साल तक बंधक बनाकर रखा।
महिला का कहना है कि वर्ष 2012 में जब वह वापस अपने गांव लौटी, तब गांव के दबाव में आकर उसका जबरन निकाह अफसर हुसैन से करा दिया गया। इस शादी से महिला के दो बच्चे हैं—एक 14 वर्षीय बेटी और एक 8 वर्षीय बेटा।
तीन तलाक के बाद भी बना रहा दबाव
पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2018 में उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया था, लेकिन इसके बावजूद वह उसे लगातार परेशान कर रहा है। महिला का आरोप है कि अब आरोपी उसके बच्चों पर भी धार्मिक दबाव बना रहा है।
महिला के मुताबिक उसका पति 8 साल के बेटे का खतना कराने और बच्चों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए दबाव डाल रहा है। जब उसने इसका विरोध किया, तो उसे जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
डर और असुरक्षा के माहौल के कारण महिला फिलहाल अपना घर छोड़कर छिपने को मजबूर है।
हमले का आरोप, पुलिस पर भी सवाल
जनसुनवाई के दौरान महिला ने आयोग की अध्यक्ष के सामने अपने सिर पर लगे घाव दिखाए। उसने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले उस पर चाकुओं से हमला किया गया था, लेकिन पुलिस ने मामले को हल्का दिखाने के लिए गलत मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर दी।
महिला ने यह भी कहा कि शिकायत करने के बाद पुलिस उसके चरित्र पर ही सवाल उठाने लगी है। उसने भावुक होकर कहा कि अगर उसका चरित्र ही खराब बताया जा रहा है, तो सरकार उसे ऐसा प्रमाणपत्र ही दे दे ताकि वह शांति से जी सके।
महिला आयोग ने दिए सख्त निर्देश
महिला की आपबीती सुनने के बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि पीड़िता का तुरंत निष्पक्ष मेडिकल परीक्षण कराया जाए और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आयोग ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और महिला आयोग की निगरानी में आगे की कार्रवाई की जा रही है।


