नवादा में जीतन राम मांझी का ‘छलका’ दर्द! “पिता शराब बेचते थे, पर मैंने कभी नहीं चखा”; शराबबंदी को बताया सही, पर सिस्टम की खोली पोल

HIGHLIGHTS

  • बड़ा खुलासा: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने साझा किया अपना पारिवारिक अतीत; कहा— “पिताजी शराब बनाकर बेचते थे, लेकिन मैंने कभी उसे छुआ तक नहीं।”
  • नीति सही, नीयत खराब: शराबबंदी को बताया बहुत अच्छी चीज, लेकिन क्रियान्वयन (Implementation) करने वाले अफसरों पर साधा निशाना।
  • गरीबों पर गाज: “6 लाख केसों में 4 लाख गरीब जेल में”; मांझी ने कहा— सरकार को बदनाम करने के लिए पकड़े जा रहे हैं गरीब।
  • नितीश को धन्यवाद: शराबबंदी की तीन बार समीक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री के फैसले का किया स्वागत।

नवादा | 15 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति में ‘शराबबंदी’ हमेशा से एक ऐसा मुद्दा रहा है जिस पर पक्ष और विपक्ष के सुर बदलते रहते हैं। लेकिन नवादा पहुँचे केंद्रीय मंत्री और ‘हम’ (HAM) संरक्षक जीतन राम मांझी ने इस बार जो कहा, उसने सबको चौंका दिया है। मांझी ने शराबबंदी का पुरजोर समर्थन तो किया, लेकिन साथ ही पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़वे सवाल भी दाग दिए।

“पिताजी शराब बेचते थे, पर मैं आज तक ‘कोरा’ हूँ”

​अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में जीतन राम मांझी ने अपनी निजी जिंदगी का पन्ना खोला। उन्होंने कहा, “मैं वैसे परिवार से आता हूँ जहाँ मेरे पिताजी खुद शराब बनाकर बेचते थे। लेकिन यह मेरे संस्कार और संकल्प हैं कि मैंने आज तक शराब को कभी मुंह नहीं लगाया।” उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में शराबबंदी के फायदों का प्रचार-प्रसार और भी बड़े पैमाने पर होना चाहिए।

“पाव भर वालों को न पकड़ें”: नितीश की सलाह और पुलिस की ‘मनमानी’

​मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि सीएम की नीयत साफ है। “पिछली समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि जो व्यक्ति पाव भर (छोटी मात्रा) पीकर जा रहा है या घर ले जा रहा है, उसे परेशान न किया जाए। लेकिन धरातल पर कुछ और ही हो रहा है।” मांझी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर सरकार को बदनाम करना चाहते हैं।

आंकड़ों का ‘खौफनाक’ सच: 6 लाख में से 4 लाख गरीब

​केंद्रीय मंत्री ने शराबबंदी कानून के तहत हुई गिरफ्तारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में अब तक करीब 6 लाख केस दर्ज हुए हैं, जिनमें से 4 लाख गरीब लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया गया है। मांझी का इशारा साफ था कि पुलिस बड़े तस्करों को छोड़कर उन गरीबों को निशाना बना रही है जो आसानी से हत्थे चढ़ जाते हैं।

VOB का नजरिया: मांझी की ‘कड़वी-मीठी’ नसीहत

​जीतन राम मांझी का यह बयान एनडीए के भीतर चल रही उस खींचतान को भी दर्शाता है, जहाँ सहयोगी दल शराबबंदी के ‘अंजाम’ से डरे हुए हैं। मांझी का खुद का उदाहरण यह साबित करता है कि नशा छोड़ना संस्कार और शिक्षा का विषय है, केवल कानून का नहीं। उनकी बात में दम है—अगर 6 लाख में से 4 लाख गरीब ही पकड़े जा रहे हैं, तो सवाल उठता है कि ‘बड़े सिंडिकेट’ चलाने वाले असली मगरमच्छ कहाँ हैं? क्या पुलिस केवल संख्या (Targets) पूरी करने के लिए गरीबों का इस्तेमाल कर रही है? मुख्यमंत्री को अब ‘समीक्षा’ से आगे बढ़कर ‘सफाई’ (प्रशासनिक) पर ध्यान देना होगा।

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