लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें! “घूस के पैसों से खरीदीं करोड़ों की संपत्तियां”; ईडी ने कोर्ट में खोल दी पूरी ‘कुंडली’

HIGHLIGHTS

  • बड़ा दावा: ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में कहा— रेल मंत्री रहते हुए लालू परिवार ने रिश्वत के पैसों से अचल संपत्तियां बटोरीं।
  • लैंड फॉर जॉब स्कैम: ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन लिखवाने का है गंभीर आरोप।
  • शेल कंपनी का खेल: ‘एके इंफोसिस्टम’ के जरिए संपत्तियों पर नियंत्रण करने की साजिश का खुलासा।
  • आरोपी घेरे में: लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य पर आरोप तय करने पर सुनवाई जारी।

नई दिल्ली/पटना | 15 मार्च, 2026

​बिहार की सियासत में ‘लैंड फॉर जॉब’ (नौकरी के बदले जमीन) मामले ने एक बार फिर उबाल ला दिया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू प्रसाद यादव के परिवार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। ईडी ने अदालत के सामने दावा किया कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद के परिवार ने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल भारी-भरकम अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया।

साजिश का ‘एके इंफोसिस्टम’ कनेक्शन: कैसे घुमाया गया पैसा?

​ईडी ने कोर्ट को बताया कि यह केवल जमीन का लेन-देन नहीं, बल्कि एक सोची-समझी गहरी साजिश थी।

  • कंपनी पर कब्जा: जांच एजेंसी के मुताबिक, सबसे पहले ‘एके इंफोसिस्टम’ नामक कंपनी के शेयर हासिल किए गए।
  • मुखौटा कंपनी: रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्ति के बदले जो जमीनें ली गईं, उन्हें सीधे अपने नाम न करवाकर इस कंपनी के नाम दर्ज कराया गया।
  • अंतिम नियंत्रण: बाद में धीरे-धीरे पूरी कंपनी पर लालू परिवार का मालिकाना हक स्थापित हो गया। इस कंपनी के तार कारोबारी अमित कात्याल से जुड़े हैं, जिन्हें तेजस्वी यादव का बेहद करीबी बताया जाता है।

“आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत”: ईडी का कड़ा रुख

​अदालत में आरोप तय करने (Framing of Charges) पर बहस के दौरान ईडी ने दोटूक कहा कि उनके पास लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के उन रास्तों का पूरा चार्ट पेश किया, जिसके जरिए कथित तौर पर रिश्वत के पैसे को ‘सफेद’ कर प्रॉपर्टी में निवेश किया गया।

VOB का नजरिया: कानूनी चक्रव्यूह में फंसा ‘कुनबा’?

​नौकरी के बदले जमीन का यह मामला लालू परिवार के लिए एक ‘अंतहीन कानूनी दुःस्वप्न’ बनता जा रहा है। ईडी का यह दावा कि संपत्तियां रिश्वत के पैसों से खरीदी गईं, तेजस्वी यादव की उस छवि के लिए बड़ी चुनौती है जिसे वे ‘विकास पुरुष’ के रूप में गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, आरजेडी इसे हमेशा ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार देती रही है, लेकिन कोर्ट में पेश ‘एके इंफोसिस्टम’ वाले दस्तावेजी सबूतों की काट ढूंढना उनके वकीलों के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है। बिहार की राजनीति में 2025 के बाद अब 2026 का यह साल भी ‘अदालती तारीखों’ और ‘सियासी वार-पलटवार’ के नाम रहने वाला है।

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