HIGHLIGHTS
- बड़ी पहल: केंद्र सरकार के ‘नव्या प्रोजेक्ट’ के जरिए किशोरियों को बनाया जा रहा है ‘स्किल इंडिया’ का चेहरा।
- गया बना हब: बिहार में पायलट प्रोजेक्ट के लिए गयाजी का चयन; 5 प्रखंडों में शुरू हुई हाई-टेक ट्रेनिंग।
- फ्यूचर स्किल्स: फैशन डिजाइनिंग ही नहीं, अब ड्रोन असेंबलिंग और सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग भी सीखेंगी बेटियां।
- पात्रता: 14 से 18 वर्ष की आयु और न्यूनतम 10वीं पास होना अनिवार्य; पोषण ट्रैकर से हो रहा चयन।
पटना/गयाजी | 14 मार्च, 2026
बिहार की बेटियां अब केवल चूल्हा-चौका या पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई तक सीमित नहीं रहेंगी। केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने गयाजी की किशोरियों के लिए ‘नव्या प्रोजेक्ट’ (Navya Project) के रूप में संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। इस विशेष पायलट कार्यक्रम के तहत 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को ऐसे हुनर सिखाए जा रहे हैं, जिनकी मांग आज के डिजिटल युग में सबसे ज्यादा है।
“नव्या प्रोजेक्ट”: हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर उड़ान
प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन के तहत संचालित यह योजना किशोरियों के समग्र सशक्तिकरण पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य उन्हें व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी (Job-oriented) कौशल में निपुण बनाना है। देश के 19 राज्यों के 27 जिलों में शुरू हुई इस योजना के लिए बिहार से गयाजी का चयन किया गया है। गया के पाँच प्रमुख केंद्रों— बोधगया, गुरारू, मानपुर, शेरघाटी और डुमरिया में यह कार्यक्रम पूरी रफ्तार से चल रहा है।
ड्रोन से लेकर ग्राफिक्स तक—पुरानी परंपराओं को तोड़ रही हैं बेटियां
नव्या योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका आधुनिक पाठ्यक्रम है। अब लड़कियां न केवल प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट या फैशन डिजाइनर बन रही हैं, बल्कि वे उन क्षेत्रों में भी हाथ आजमा रही हैं जिन्हें अब तक पुरुषों का गढ़ माना जाता था:
- टेक स्किल्स: सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, ग्राफिक्स डिजाइनिंग और स्मार्टफोन टेक्निशियन।
- फ्यूचर टेक: ड्रोन असेंबलिंग, सीसीटीवी इंस्टॉलेशन और सोलर पीवी इंस्टॉलेशन (सूर्यमित्र)।
- सर्विस सेक्टर: फूड एंड बेवरेज सर्विस, कस्टमर सर्विस और मर्चेंडाइजिंग।
शेरघाटी के अनुष्का स्किल एजुकेशन सेंटर में अकेले 80 किशोरियां फैशन डिजाइनिंग की बारीकियां सीख रही हैं। अब तक जिले की 532 किशोरियां ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा चुकी हैं।
पंजीकरण की क्या है प्रक्रिया?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए लड़कियों का पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत होना और आधार सत्यापन (Aadhaar Verification) अनिवार्य है। प्रशिक्षण के लिए ‘स्किल रूट एड टेक’, ‘पोस्टेरिटी कंसल्टिंग’ और ‘एम्बिशाइन स्किल’ जैसे संस्थानों को चिन्हित किया गया है, जो उन्हें आधुनिक लैब और विशेषज्ञों के जरिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।
VOB का नजरिया
’नव्या प्रोजेक्ट’ केवल एक ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं, बल्कि ग्रामीण किशोरियों के आत्मविश्वास में किया गया बड़ा निवेश है। 14-18 साल की उम्र में जब बेटियां अपने भविष्य के सपने बुन रही होती हैं, तब उन्हें ड्रोन और एआई (AI) जैसी तकनीक से जोड़ना क्रांतिकारी कदम है। अक्सर देखा जाता है कि हुनर होने के बावजूद डिग्रियों के अभाव में लड़कियां पीछे रह जाती हैं, लेकिन यहाँ 10वीं पास की न्यूनतम योग्यता ने एक बड़ा प्लेटफॉर्म दिया है। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि ट्रेनिंग के बाद इन बेटियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार या ‘स्टार्टअप लोन’ भी मिले, ताकि ‘नव्या’ का सपना हकीकत में ‘सशक्त बिहार’ की नींव बन सके।


