
HIGHLIGHTS
- बंपर भुगतान: राज्य के किसानों को अब तक ₹1,918.23 करोड़ की राशि सीधे खाते में मिली।
- रिकॉर्ड खरीदारी: सत्र 2025-26 में लगभग 5.67 करोड़ क्विंटल गन्ने की हुई कुल खरीद।
- नंबर-1 मिल: हरिनगर चीनी मिल ने सर्वाधिक 127.80 लाख क्विंटल गन्ना खरीदकर बनाया रिकॉर्ड।
- सख्त निर्देश: गन्ना उद्योग विभाग ने मिलों को शेष 9% बकाया राशि का जल्द भुगतान करने का दिया आदेश।
पटना | 14 मार्च, 2026
बिहार के गन्ना किसानों के लिए इस बार का पेराई सत्र आर्थिक रूप से काफी राहत भरा साबित हो रहा है। गन्ना उद्योग विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पेराई सत्र 2025-26 के अभी पूरी तरह समाप्त होने से पहले ही चीनी मिलों ने किसानों के बकाये का 91 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। यह राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि अक्सर गन्ना भुगतान में देरी किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी रहती थी।
₹2,110 करोड़ की फसल और मिलों का ‘फास्ट’ पेमेंट
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस सीजन में राज्य की चीनी मिलों ने किसानों से कुल 5 करोड़ 67 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की है। इस पूरी फसल की कुल लागत लगभग ₹2,110.80 करोड़ आंकी गई थी। राहत की बात यह है कि 12 मार्च 2026 तक मिल संचालकों ने इसमें से ₹1,918.23 करोड़ का भुगतान कर दिया है। शेष 9 फीसदी राशि के लिए विभाग ने मिलों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
हरिनगर और नरकटियागंज का दबदबा, देखें मिलवार आंकड़े
गन्ने की खरीदारी के मामले में पश्चिम चंपारण की मिलों का प्रदर्शन शानदार रहा है।
- हरिनगर चीनी मिल: 127.80 लाख क्विंटल (प्रथम स्थान)
- नरकटियागंज चीनी मिल: 99.78 लाख क्विंटल (द्वितीय स्थान)
- बगहा चीनी मिल: 81.08 लाख क्विंटल (तृतीय स्थान)
अन्य प्रमुख मिलों में मझौलिया (53.79 लाख क्विंटल), हसनपुर (44.95 लाख क्विंटल), सिधवलिया (44.51 लाख क्विंटल) और गोपालगंज (33.82 लाख क्विंटल) शामिल हैं। वहीं रीगा चीनी मिल ने 17.48 लाख क्विंटल और सीवान के प्रतापपुर मिल ने 3.58 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की है।
ईखायुक्त का आदेश: “बकाया चुकाने में न करें देरी”
गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए ईखायुक्त ने सभी मिल संचालकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जो भी बकाया राशि बची है, उसका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। विभाग का लक्ष्य है कि पेराई सत्र के पूर्णतः समापन तक किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान क्लियर हो जाए, ताकि उन्हें अगली फसल के लिए आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
VOB का नजरिया
गन्ना भुगतान में तेजी आना बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘बूस्टर डोज’ की तरह है। समय पर पैसा मिलने से न केवल किसानों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि वे आधुनिक खेती में निवेश करने के लिए भी प्रेरित होते हैं। हरिनगर और नरकटियागंज जैसी मिलों का समय पर भुगतान करना अन्य मिलों के लिए एक मिसाल है। हालांकि, विभाग को उन मिलों पर विशेष नजर रखनी होगी जहाँ भुगतान की रफ्तार अब भी धीमी है। गन्ना किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘उद्यमी’ बनाने की दिशा में यह पारदर्शी भुगतान प्रणाली एक बड़ा कदम है।


